संघ लोक सेवा आयोग की साल 2017 की सिविल सेवा परीक्षा में असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों से कुल 23 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। इनमें से 16 कैंडिडेट असम के हैं, तो चार अरुणाचल प्रदेश से और तीन मणिपुर से हैं। एक समय था जब यूपीएससी की परीक्षा के नतीजों के बाद उत्तर भारत के छात्रों की चर्चा अधिक होती थी, लेकिन अब पूर्वोत्तर राज्यों के छात्र भी सफलता के इस दौड़ में शामिल हो रहे हैं। असम के ही सुभोजित भुइयां ने 645वां रैंक हासिल की है।

उनका कहना है कि सिविल सेवा परीक्षा जैसी अधिक प्रतिस्पर्धा वाली परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत के साथ स्मार्ट वर्क भी जरूरी होता है। जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद सुभोजित असम सिविल सेवा की परीक्षा दी और सफल हुए। इस समय वे सिलचर में सहायक कमिश्नर के पद पर काम कर रहे थे। सुभोजित बताते है कि यूपीएससी में सफल होने के लिए मैंने स्मार्ट वर्क किया था, लेकिन उसका तरीका तलाशने में मुझे तीन बार असफलता का सामना करना पड़ा। पूर्वोत्तर राज्यों से सिविल सेवा परीक्षा में सामने आ रहे अच्छे नतीजों पर सुभोजित कहते हैं कि यह एक लंबी प्रक्रिया रही है। यह एक दिन में नहीं हुआ है। राज्य सरकार की भी सकारात्मक भूमिका रही है।

सरकार ने यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को एक लाख पच्चीस हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिया है ताकि वे आगे की तैयारी अच्छी तरह कर सकें। इसके अलावा गुवाहाटी विश्वविद्यालय और असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में भी कोचिंग की व्यवस्था की जाती है। हालांकि सुभोजित इस बात को मानते हैं कि दिल्ली के मुकाबले पूर्वोत्तर राज्यों में कॉम्पिटिटिव इको सिस्टम की कमी है। उदाहरण के तौर पर वो कहते है कि पूर्वोत्तर राज्यों में यूपीएससी परीक्षा से जुड़ी अध्ययन सामग्री की उपलब्धता कम है। ऐसे में अगर कोई असमिया भाषा में परीक्षा देना चाहता है तो उसमें पढऩे के लिए सामग्री ही नहीं है।