यूक्रेन में अभी भी कई भारतीय छात्र फंसे (Indian Students trapped in Ukraine) हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि न तो भारत सरकार (Indian Government) और न ही कीव स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassy in Ukraine) उन्हें निकालने के लिए आया है। छात्रों ने कहा है कि उन्हें युद्धग्रस्त देश में उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की गई वीडियो में छात्रों के एक समूह ने शिकायत की है कि उन्हें रोमानिया की सीमा पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा शारीरिक रूप से प्रताड़ति किया जा रहा है। इनमें से ज्यादातर छात्र यूक्रेन की राजधानी स्थित भारतीय दूतावास से नाराज थे। वीडियो में एक लड़की ने शिकायत करते हुए कहा,''हमें छोड़कर सभी विदेशों नागरिकों को बाहर निकाला जा चुका है। भारत सरकार हमें बाहर निकालने के लिए कुछ नहीं कर रही है, कृपा करके भारतीय मीडिया पर विश्वास न करें।'

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उसने कहा कि भारतीय दूतावास ने हमें केवल यूक्रेन की सीमा से बाहर निकलने के लिए कहा है। ऐसी करना संभव नहीं है, क्योंकि जिस जगह वे मौजूद हैं, वहां से सबसे निकटतम सीमा 800 किमी दूर है। इतना ही नहीं उसने भारतीय दूतावास के एक कर्मचारी विक्रम कुमार पर आरोप लगाया है कि वह उनके फोन कॉल बार-बार काट रहे हैं। छात्रा ने आगे कहा, 'हमारा मार्गदर्शन करने के बजाय, वे हमें नजरअंदाज कर रहे हैं।' ओडिशा की एक अन्य छात्रा ने कहा कि उसके दोस्त एक रेलवे स्टेशन के बाहर एक-डेढ़ दिन से मदद का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भारतीय दूतावास से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली है। उसने कहा कि यहां आस-पास कोई दुकान मौजूद नहीं है, जहां से उन्हें खाना या किराना का सामान मिल सके। छात्रा ने कहा, 'हमने 12 घंटे लाइन में लग कर टिकट खरीदे, लेकिन अब हमें बाहर जाने के लिए आप्रवास मंजूरी नहीं मिल रही है। भारतीय दूतावास यहां से 8-9 किमी की दूरी पर है, लेकिन वह हमारी कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं। हमें दूतावास से कोई भी मदद नहीं मिल रही है।'

छात्रा के साथ मौजूद एक अन्य छात्रा ने कहा कि हमें केवल खालसा समूह द्वारा मदद दी जा रही है। वीडियो में छात्रों के एक अन्य समूह ने शिकायत की कि उन्होंने जिस परिसर में शरण ली थी उसका मुख्य द्वार टूट गया है। हम नहीं जानते यह किसने तोड़ा और वह गोलाबारी से भयभीत हैं। छात्रों के वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस ने बुधवार को प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चुनाव जीतने में व्यस्त हैं और उन्होंने यूक्रेन में फंसे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार भारतीय छात्रों वापस लाने में नाकाम रही। इस दौरान पार्टी ने यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास की भूमिका पर भी सवाल उठाए। इतना ही नहीं कांग्रेस ने यूक्रेन के अलग-अलग स्थानों पर फंसे छात्रों के वीडियो भी साझा किए। 

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गौरतलब है कि खार्किव में खाना लेने गए कर्नाटक के 21 वर्षीय छात्र नवीन की मंगलावार को रूसी हमले में मौत हो गई थी। इसके अलावा कांग्रेस ने ट्वीटर पर स्पीक-अप फॉर आवर स्टूडेंट नाम से हैशटेग भी चलाया। एक ट्वीट में कांग्रेस ने कहा, 'सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल हो गई है। भारतीय नागरिकों के उत्पीडऩ और मारपीट के वीडियो आम हो गए हैं, इन वीडियो को देखकर हर देशवासी भयभीत हो गया है।' यूक्रेन में फंसे छात्रों की दर्द और उनके माता-पिता और परिवार वालों की पीड़ा देखी नहीं जा रही है। यह केवल भारत सरकार की विफलता नहीं बै बल्कि भारतीय दूतवास की भी नाकामी है, जिसको छात्रों ने उजागर किया है। पार्टी ने कहा, 'भारत कैसे इन युवाओं की तस्वीर भूल सकता है, जो भूख-प्यास से तड़प रहे हैं और बिना किसी मदद के यूक्रेन के मेट्रो स्टेशन पर सो रहे हैं।' भारत सरकार यूक्रेन से कई छात्रों को पड़ोसी देशों में सीमा पार करने के बाद वापस लाई है।