राजनीति के कद्दावर नेता के रूप में कई दशक तक सक्रिय रहे बेनी प्रसाद वर्मा के निधन हो गया है। प्रदेश और देश की राजनीति में मंत्री रह चुके बेनी वर्मा राजनीति सफर के साथ साथ अपनी जीवन लीला खत्म कर दी है। राजनीति के सफर में वह बाबू जी के नाम से लोकप्रिय थे। आपको बता दें कि लोकप्रियता उनके अक्खड़ स्वभाव और कड़क मिजाज के बावजूद भी  बनी रही।

क्योंकि राजनीति में अपनी बात ही मनवाने का दृढ़ संकल्प उनके इस स्वाभाव के कायल दूसरे दलों के लोग भी थे। राजनीति के मंझे खिलाड़ी बेनी बाबू जहां यारों के यार थे वहीं जनसेवा में आई अड़चन के लिए आर-पार करने के लिए मैदान में उतरने से भी नहीं हिचकते थे। कई बार चर्चा के दौरान जिक्र किया कि मुलायम सिंह यादव और अजीत सिंह के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर छिड़ी जंग में उन्होंने अपना नाम लाया गया तो उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि वह मेरे मित्र हैं।

लेकिन दोनों मुलायम सिंह यादव और अजीत सिंह में जब खटकी तो बेनी बाबू ने सपा छोड़कर राष्ट्रीय क्रांतिदल पार्टी बना लिए थे।। इसी तरह जिले में भी कई लोगों पर हाथ रखकर विधानसभा और लोकसभा भिजवाया और उन्हीं को पार्टी में रहते हुए हराया भी था। आपको जानकारी दें दे कि राज्य सरकार में कारागार से लेकर लोक निर्माण, वित्त और संसदीय कार्यमंत्री का कार्यकाल रहा हो या फिर संचार और कोयला मंत्री के रूप में केंद्र सरकार में उनका दौर, उनकी कार्यशैली के सभी कायल थे। 

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