घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए भारत अब अपनी सरहदों को स्टील फेंस सिस्टम से लैस करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत असम के सिलचर में बांग्लादेश से लगती सीमा से हो गई है। सीमा पर लगाई जाने वाली स्टील फेंस यानी बाड़ पर बाहरी मौसम का कोई असर नहीं होगा और इसे काटा भी नहीं जा सकेगा।

इतनी आएगी लागत

स्टील से निर्मित इस फेंसिंग सिस्टम को लगाने में एक किलोमीटर के लिए 1 करोड़ 99 लाख रुपये की लागत आएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल असम के सिलचर में सात किलोमीटर तक इसे लगाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने देश की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को 10 साल में इस फेंसिंग सिस्टम से लैस करने की योजना थी। इसे घटाकर अब 5 साल कर दिया गया है। इसके लिए रक्षा, गृह और दूरसंचार मंत्रालय की एक संयुक्त उच्चस्तरीय टीम बनाई गई है।


ये हैं इसकी खूबियां

भारत की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए यह स्मार्ट प्रोजेक्ट लांच किया गया है। यह स्टील का बना है। फेंसिंग के समय दो तरफ से फेंसिंग करनी होती है लेकिन नए फेंसिंग में सिंगल फेंसिंग की जा रही है। स्टील का बने होने की वजह से पूरा स्ट्रक्चर इतना मजबूत है कि उसे किसी भी धारदार हथियार से काटा ही नहीं जा सकता। इसके अलावा यह गरमी, बरसात और ठंड हर तरीके के मौसम को भी झेल सकेगा।

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