अगर आप बिजनेस करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ट्राउट मछली पालन पर विचार कर सकते हैं। इस बिजनेस को करने के लिए आपको 20 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। यह सब्सिडी नाबार्ड देती है। नाबार्ड के अनुसार, ट्राउट फार्मिंग मात्र 2.3 लाख रुपए में शुरू की जा सकती है। अगर आपको सब्सिडी मिल जाती है तो आपको खुद से सिर्फ 1.8 लाख रुपए का ही निवेश करना होगा।


पिछले दिनों केंद्रीय पशुपालन, मछली पालन और डेयरी मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था कि देश में मछली पालन में अपार संभावनाएं हैं और इससे किसानों की आमदनी पांच गुनी हो सकती है। मछली पालन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने दो विधेयकों का मसौदा तैयार किया है और ये विधेयक संसद के चालू सत्र में ही पेश किए जाएंगे। इन विधेयकों में एक राष्ट्रीय समुद्रीय मछली पालन नियमन और प्रबंधन विधेयक शामिल हैं।


मछली किसानों के मेकेनाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। देश के 11 लाख हेक्टेयर बैक वाटर में मछली पालन की बहुत संभावनाएं हैं। देश के भीतर जिन राज्यों में खारा पानी है, अब वहां झींगा की खेती होगी। 19509 किलोमीटर लंबाई की नदियों में मछली पालन की योजना है। देश में 25 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबा में पोखर, तालाब और जलाशय हैं। इनमें उत्पादन केवल तीन टन प्रति हेक्टेयर है, जिसे बढ़ाने की संभावनाएं है।


रिपोर्ट के मुताबिक, ट्राउट एक प्रकार की मछली है, जो साफ पानी में पाई जाती है। भारत के कुछ राज्‍यों में यह मछली बड़ी तादात में पाई जाती है। इनमें हिमाचल प्रदेश, जम्‍मू कश्‍मीर, उत्‍तराखंड, तमिलनाडु, करेल प्रमुख है। इन राज्‍यों में ट्राउट प्रोडक्‍शन के लिए इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर भी उपलब्‍ध है। राज्‍य सरकारों द्वारा ट्राउट फिश फार्मिंग को प्रमोट करने के लिए कई इन्‍सेंटिव प्रोग्राम भी चलाए जा रहे हैं।


अगर आपने लोन लिया है तो पहले साल का ब्‍याज 26,700 रुपए होगा। इस तरह आपको पहले साल में कुल 3 लाख रुपये का निवेश करना होगा। जिस पर आपको 20 फीसदी यानी कि लगभग 60 हजार रुपये की सब्सिडी मिल जाएगी। यदि आप एससी या एसटी कैटेगिरी से हैं तो आपको 25 फीसदी सब्सिडी मिलेगी।

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