कोलंबो। श्रीलंका अपने व्यस्ततम बंदरगाहों में से एक कोलंबो में प्रस्तावित कोलंबो पोर्ट सिटी प्रोजेक्ट (सीपीसी) में निवेश के लिए भारतीय निवेशकों को लुभाने में जुटा है। कोलंबो बंदरगाह शहर आर्थिक आयोग के प्रवक्ता सालिया विक्रमासूर्य ने कहा कि बंदरगाह शहर की ओर से अगले दो से तीन माह में भारत में एक रोड शो का आयोजन किया जायेगा जिसमें दिखाया जायेगा कि श्रीलंका के प्रोजेक्टों में निवेश से भारतीय निवेशकों को कितना अधिक फायदा होगा। 

बंदरगाह शहर प्रोजेक्ट को श्रीलंका सरकार और प्रोजेक्ट कंपनी सीएचईसी पोर्ट सिटी कोलंबो प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा सार्वजनिक और निजी सहयोग (पीपीपी) से 1.4 बिलियन डॉलर की लागत से बनाया जायेगा। मार्च 2021 तक 1.12 बिलियन डॉलर का निवेश अभी तक किया जा चुका है और अभी 380 मिलियन डॉलर का निवेश होना बाकी है। कोलंबो पोर्ट सिटी इकोनॉमिक कमीशन (सीपीसीईसी) बिल पिछले साल आठ अप्रैल को संसद के पटल पर मंजूरी के लिए रहा गया था और 20 मई को मंजूरी मिल गयी थी। 

सीएचईसी पोर्ट सिटी कोलंबो की मार्केटिंग और सेल्स डायरेक्टर यमुना जयारत्ने ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत पांच अलग अलग संरचनायें फाइनेंशियल डिस्ट्रिक, सेंट्रल पार्क, लिविंग, इंटरनेशनल आईलैंड, द मेरियाना एंड आईलैंड लिविंग बनायी जायेंगी जिनका अपना अलग-अलग अस्तित्व होगा और इसके निर्माण के लिए 105 हेक्टेयर भूमि तैयार है। श्रीलंका सरकार 99 साल के लिए 116 हेक्टेयर विपणन योग्य भूमि सीपीसीसी के लिए लीज पर देगी और बाकी का निर्माण सरकार स्वयं करेगी। विक्रमासूर्य ने कहा कि पोर्ट सिटी कोलंबो में भारत के सहयोग से अनुसंधान और विकास केंद्रों तथा नवाचार प्रयोगशालाओं की स्थापना करेगा ताकि भविष्य में दक्षिण एशिया के बाजारों में तकनीकी और सेवाओं के क्षेत्र में बिखरे पड़े अवसरों का लाभ लिया जा सके।

इसके अलावा आईटीईएस, बिग डाटा, एनालिट्क्सि, रोबोटिक्स और एआई के क्षत्र में भी सहयोग की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि ङ्क्षहद प्रशांत क्षेत्र और इसके आगे भारत को संरचना निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। भारत और श्रीलंका के बीच विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में जो सहयोग चल रहा है वह और तीन साल के लिए बढ़ाया गया है। यह फैसला इस साल 20 जनवरी को भारत-श्रीलंका पांचवी संयुक्त समति की बैठक के दौरान किया गया था।