अवैध घुसपैठ के आरोप में पिछले दो सालों से असम की जेल में बंद सोफिया खातून को सुप्रमीम कोर्ट ने भारतीय नागरिक करार देते हुए जेल से रिहा करने का फैसला सुनाया है।


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को खातून की रिहाई के आदेश दिए जाने के फैसले के साथ ही एस बात का भी फैसला सुनाया कि उसके माता-पिता, पांच भाई और पति सभी भारतीय नागरिक थे।


सोफिया खातून 50 साल की हैं और विदेशी ट्रिब्यूनल के एक आदेश पर उन्हें अवैध घुसपैठिया करार देते हुए 2016 में जेल भेज दिया गया था। डी-वोटर यानी संदिग्ध मतदाता के रूप में सूचीबद्ध होने के बाद ट्रिब्यूनल खातून की भारतीय नागरिकता के दावों से संतुष्ट नहीं था। खातून की तीन बेटियां और एक बेटा है।


न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को कहा कि उन्हें कोकराझाड़ की जेल में हिरासत में अब और दिन नहीं रखा जा सकता है जब राज्य सरकार ने इस बात की घोषणा कर दी है कि उनके माता-पिता, सभी भाई और पति के पास वैध भारतीय नागरिकता थी।


कोर्ट ने अपने फैसलमें में खातून को महीने में एक बार बरपेटा में पुलिस स्टेशन के सामने उपस्थित होने की से भी मुक्त कर दिया है।