असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने सोमवार को कहा कि मौजूदा अनुसूचित जनजाति (अजजा) समुदायों को मिल रहे अधिकारों एवं सुविधाओं को प्रभावित किये बगैर राज्य के छह समुदायों को अजजा का दर्जा देने के मामले को अंतिम रूप दिया जायेगा।

कोच-राजबोंगशी समुदाय से आने वाले 14 संगठनों के सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों ने मूल समुदायों के हितों के संरक्षण एवं राज्य की विशिष्ट पहचान बनाये रखने के लिये इन छह समुदायों को अजजा का दर्जा देने के संबंध में ईमानदार कदम उठाया है। बता दें कि जिन समुदायों को अजजा का दर्जा दिया जाना प्रस्तावित है उनमें कोच राजबोंगशी, ताई अहोम, चुटिया, मटक, मोरन और 36 चाय बागान जनजातियां शामिल हैं, जो राज्य की आबादी का बड़ा हिस्सा हैं।

सोनोवाल ने कहा कि मामले में आगे की कार्रवाई के लिये मंत्रियों का समूह (जीओएम) गठित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल बुद्धिजीवी वर्ग के साथ मिलकर विचार-विमर्श करे और इस संबंध में तकनीकी, कानूनी एवं संविधान सम्मत विचारों के साथ आगे आयें। सोनोवाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि विधेयक कभी भी मूल जनजातियों के हितों को नुकसान नहीं पहुंचायेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि वे कोच-राजबोंगशी समुदाय की समृद्ध विरासत, कला एवं संस्कृति को संरक्षण करने के उपाय सुझायें। ऑल कोच-राजबोंगशी स्टूडेंट यूनियन के नेताओं बिस्वजीत रॉय और हितेश बर्मन ने छह समुदायों को अजजा दर्जा दिये जाने के संदर्भ में सरकार द्वारा उठाये गये कदमों पर संतोष जताया। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को दो ज्ञापन भी सौंपे, जिनमें समुदाय की कई मांगों को रेखांकित किया गया था।