कोरोना महामारी ने कई परिवारों से अपनों को छीन लिया। ऐसा ही कहर टूटा महाराष्ट्र के सांगली जिले में रहने वाले अरुण कोरे के परिवार पर। पिछले साल उन्होंने अपने इंस्पेक्टर पिता रावसाहेब शामराव कोरे को कोरोना के कारण खो दिया। परिवार के मुखिया के यूं अचानक चले जाने से पूरा परिवार टूट गया। परिवार का दुख देख बेटे अरुण ने पिता का सिलिकॉन स्टेच्यू बनाने का फैसला लिया और आज यह प्रतिमा इस परिवार को शामराव के पास होने का एहसास करवाती है। परिवार का कहना है कि उनकी कमी तो पूरी नहीं हो सकती, लेकिन इस स्टेच्यू को देखकर लगता है कि वो हमारे पास हैं, साथ हैं।

अरुण ने बताया, पिता मृत्यु हमारे लिए बड़ा सदमा है। हम उन्हें बहुत याद करते हैं। एक दिन यूट्यूब पर मैंने वीडियो देखा जिसमें कर्नाटक के एक व्यापारी ने अपनी पत्नी के निधन के बाद उनका स्टेच्यू बनवाया था। जिसके बाद मैंने भी ऐसा ही करने का सोचा। मैंने बेंगलुरु के एक आर्टिस्ट श्रीधर से संपर्क किया। श्रीधर ने दो महीने के भीतर सिलिकॉन स्टेच्यू तैयार कर दिया। अरुण कहते हैं मैं पिछले हफ्ते स्टेच्यू लेने गया और अचंभित रह गया। वह इतना असली दिखा कि हमें कभी महसूस ही नहीं होगा कि पिताजी हमारे बीच नहीं हैं। यह बस बोल और हिल नहीं सकता। लेकिन ऐसा लगता है कि वह आराम कर रहे हैं।

यह परिवार सांगली शहर में पुलिस कॉलोनी के पास एक बंगले में रहता है। उन्होंने घर में एक छोटा सा संग्रहालय बनाया है, जिसमें रावसाहेब का सारा सामान वर्दी, पदक और पुरस्कार आदि को रखा गया है।रावसाहेब की पत्नी लक्ष्मी का कहना है कि मेरे पति के निधन के बाद हमारा परिवार काफी परेशान था। मेरे बेटे और दामाद ने फैसला किया कि उन्हें हमारे बीच होना चाहिए। इसलिए हमने प्रतिमा बनवाई। स्टेच्यू को बनवाने में 15 लाख रुपए की लागत आई, जिसकी लाइफ लगभग 50 वर्षों तक है।