अफगानी लोगों और दुनिया भर में अधिकारिक मैसेज भेजने के लिए तालिबान द्वारा इस्तेमाल की जा रही वेबसाइट्स अचानक बंद हो गई। इसे तालिबान के खिलाफ क्रैकडाउन की कोशिश के तौर पर देखा रहा है। ये वेबसाइट्स 5 भाषाओं में है। हालांकि यह अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि पश्तो, उर्दू, अरबी, अंग्रेजी और दारी भाषाओं में ये वेबसाइट्स बंद क्यों हुई। 

इन वेबसाइट्स को क्लाउडफ्लेयर के जरिए सुरक्षा प्रदान थी, जो सैन-फ्रांसिस्को स्थित एक कंटेंट डिलिवरी नेटवर्क है। वहीं ऑनलाइन उग्रवाद पर नजर रखने वाले साइट इंटेलीजेंस ग्रुप की डायरेक्टर रीता काट्ज के मुताबिक, वॉट्सऐप ने भी कई सारे तालिबानी ग्रुप को अपने प्लेटफॉर्म से हटाया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि वेबसाइट्स का बंद होना अस्थायी हो सकता है क्योंकि तालिबान उस पर नियंत्रण को नए सिरे से सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा हो। वहीं वाट्सग्रुप को हटाने की कार्रवाई फेसबुक द्वारा तालिबान अकाउंट्स पर बैन लगाने के बाद की गई है। तालिबान के खिलाफ ये ‘ऑनलाइन कार्रवाई’ उसके अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद हो रही है।

वहीं ट्विटर ने तालिबान के अकाउंट्स को नहीं हटाया है और संगठन के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद के 3 लाख से ज्यादा फॉलोवर हैं। कंपनी ने पिछले दिनों कहा था कि जब तक ऐसे अकाउंट उनके नियमों का उल्लंघन नहीं करते हैं और हिंसा को बढ़ावा नहीं देते हैं, तो वे बने रहेंगे। वहीं फेसबुक की तरह, गूगल का यूट्यूब भी तालिबान को आतंकी संगठन मानता है और उसे अकाउंट चलाने से रोकता है।