कोरोना के कहर के बीच आर्मी के जवान लगातार सरहद पर डटे हुए हैं। ऐसे में जवानों के परिजन, रिश्तेदार भी अपनों के लिए चिंतित हैं। इस कड़ी में राजेश चौहान आर्मी में हवालदार के पद पर तैनात हैं। वह इस समय अरुणाचल प्रदेश में तेंगा बॉर्डर (चीन और भारत की सीमा) पर तैनात हैं। देश की सरहदों पर तैनात हर सैनिक के परिवार की यही कहानी है। अलीगढ़ के भी करीब 300 परिवारों के लाल देश की सुरक्षा में तैनात हैं।

इन सभी को कोरोना वायरस की चिंता सताने लगी है। जवान की पत्नी बिंदु चौहान ने बताया कि पति से हर दिन फोन पर बात हो रही है। परिवार में दो बच्चे हैं। पति को अपनी जान से ज्यादा हमारी चिंता सता रही है। वह फोन पर रुंधे गले से बात करते हैं तो मन फफक उठता है।

वहीं दूसरी ओर रामबाग कॉलोनी में ही रहने वाली गीता बघेल के पति रामनिवास असम रायफल में तैनात हैं। वह असम सीमा पर ड्यूटी दे रहे हैं। पत्नी गीता ने बताया कि पति नवंबर में घर आए थे। चार माह बाद उनको फिर से छुट्टी मिली थी। मगर, लॉकडाउन की घोषणा होने से वह घर नहीं आ पा रहे हैं। गीता ने बताया कि घर में दो छोटे बच्चे हैं। ससुराल में बूढ़े सास-ससुर हैं। घर का राशन भी खत्म हो रहा है। गैस सिलिंडर भी खत्म हो गया है। पति जब भी छुट्टी पर घर आते हैं तो इकट्ठा राशन भरवाकर जाते हैं। अब उनके न आने से घर में खाने तक के लाले पड़ जाएंगे। इधर, उनसे जब भी फोन पर बात होती है तो वह बच्चों की चिंता में परेशान हो उठते हैं।