विदेश मंत्रालय की स्थाई संसदीय समिति भारत चीन संबंधों पर एक संसदीय रिपोर्ट की सामग्री को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सहमति बनाने में कामयाब रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कांग्रेस नेता शशि थरूर ने गुरुवार को बैठक की और कुछ गोपनीय बयानों को संशोधित करने पर सहमति बनाई। रिपोर्ट में पिछले एक साल से विदेश सचिव विजय गोखले और एस जयशंकर की ओर से प्रस्तुत बयानों को शामिल किया गया है। 

इन बयानों को गोपनीय माना जाता है, सिर्फ समिति के सदस्य इन्हें सुन सकते हैं। गुरुवार को भी इस रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। शुक्रवार को सत्र के खत्म होने से पहले इस काम को पूरा किया जाना था। भाजपा के कई सदस्यों के उपस्थित न होने से बैठक का कोरम पूरा नहीं हो सका और इसे रद्द करना पड़ा। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस संसदीय स्थाई समिति का कार्यकाल अगस्त के अंत में खत्म होने जा रहा है।
 

भाजपा सांसदों का आरोप है कि कांग्रेस नेता और समिति के प्रमुख शशि थरूर गोपनीय जानकारी सार्वजनिक कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा इन जानकारियों से जुड़ी है। विपक्ष के नेताओं का मानना है कि सरकार बेवजह इस मामले को तूल दे रही है, खासतौर पर डोकलाम के मसले पर। उन्होंने कहा कि यह इस कारण से हो रहा है क्योंकि समिति के सदस्य के तौर पर राहुल गांधी इन बैठकों में नियमित हिस्सा ले रहे हैं।

अंत में गुरुवार को शशि थरूर और विदेश मंत्री के बीच हुई बैठक में इन मुद्दों को सुलझा लिया गया। विदेश मंत्रालय के एक संयुक्त सचिव रिपोर्ट पर काम कर रहे हैं ताकि कुछ गोपनीय जानकारियों को संशोधित किया जा सके और इसे रिपोर्ट में शामिल किया जा सके। कमेटी की सिफारिशों को अब तक छुआ भी नहीं गया है। इस पूरे मामले पर अंतिम मुहर अगले सप्ताह लगेगी। इसके बाद रिपोर्ट को पेश किया जाएगा। हालांकि इसे पेश करने में कुछ और हफ्तों का समय लग सकता है।