कोरोना वायरस सारी दुनिया में मौत का ताडंव कर रहा है। करोड़ों मौतों के बाद भी कोरोना का मौतों का सिलसिला अभी तक रूका नहीं हैं। एक साल होने को आए लेकिन कोरोना के खिलाफ एक भी वैक्सीन सफलतापूर्वक नहीं आई है। यही वजह है कि कोरोना से दुनिया को इतना नुकसान हुआ है। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों द्वारा कई तरह की दवाईयों से लोगों का इलाज कर रहे है और लोग ठीक भी हो रहें हैं। कोरोना महामारी और इसकी तबाही को देखते हुए इस वक्त पूरे दुनिया की उम्मीदें कोविड-19 की वैक्सीन पर टिकी हैं। लेकिन वैक्सीन वाकई में कोरोना को खत्म करती है तो इस बात वैज्ञानिक भी इनकार नहीं कर रहे हैं कि हर दवा की तरह इसके भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं।


वैक्सीन की बात करें तो दुनिया के हर देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई है। जैसे ब्राजील में चीन की कंपनी सिनोवैक की वैक्सीन। इस वैक्सीन को जब इंसान में लगाया गया तो उस शख्स की मौत हो गई थी जिस पर विवाद खड़ा हुआ था। इसी तरह से जॉन्सन एंड जॉनसन की वैक्सीन से भी वॉलंटियर की तबियत बिगड़ गई थी। एली लिली की एंटीबॉडी कॉकटेल वैक्सीन अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को दी गई थी। जिससे वह ठीक हो गए थे। जर्मन और अमेरिकी बायोनटेक+फाइजर कंपनी वैक्सीन 43 हजार लोगों को दी जिसमें से ने 93 फीसदी लोग वायरस से सुरक्षित पाए गए।


कोरोना वायरस से निपटने के लिए सब कंपनियां नतीजों तक पहुंचने की कोशिश में लगी हैं लेकिन वैक्सीन कितनी कारगर है यह समझ नहीं पा रही है। क्योंकि इसको समझने में सालों लगता है। इसी तरह से बायोनटेक और फाइजर के टीके को लेकर भी अभी यह पता नहीं है कि अलग-अलग लोगों पर इसके क्या अलग असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल इस पर शोध चल रहा है जिसके नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। वैसे जनवरी 2021 से लोगों को वैक्सीन देने की बात की जा रही है।