पहले नॉर्मल फोन आए और उसके बाद मोबाइल फोन तथा उसके बाद स्मार्टफोन आए। अब इसी तरह 2जी, 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क आए। अब 6जी आने की तैयारी है। लेकिन 6जी के साथ ही अब स्मार्टफोन इतिहास का हिस्सा बन सकते हैं। स्मार्टफोन तेजी से विकसित होने वाले प्रोडक्ट्स में से एक है।

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आज से 15-20 साल पहले मौजूदा स्मार्टफोन्स के फीचर्स वाले किसी डिवाइस को हाथ में लेकर घूमना एक कल्पना मात्र थी। स्मार्टफोन्स के तेज विकास की वजह से ही इसके भविष्य पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। Nokia के CEO Pekka Lundmark का मानना है कि साल 2030 तक 6G टेक्नोलॉजी शुरू हो चुकी होगी, लेकिन तब तक स्मार्टफोन 'कॉमन इंटरफेस' नहीं होंगे। उन्होंने ये बात दावोस में चल रहे World Economic Forum में कही है। Pekka Lundmark ने कहा कि कॉमर्शियल मार्केट में 2030 तक 6G की एंट्री हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि 6G के आने से पहले ही लोग स्मार्टफोन की तुलना में स्मार्ट ग्लासेस और दूसरे डिवाइस को यूज करने लगेंगे। नोकिया सीईओ ने बताया, 'तब तक, हम जिन स्मार्टफोन्स को यूज कर रहे हैं, वह सबसे ज्यादा यूज होने वाला इंटरफेस नहीं रह जाएंगे। इनमें से बहुत सी चीजें हमारी बॉडी में सीधे तौर पर मिलने लगेंगी।'

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हालांकि, Lundmark ने ये नहीं बताया है कि वह किस डिवाइस के बारे में बात कर रहे हैं। एलॉन मस्क की Neuralink जैसी कुछ कंपनियां फिलहाल इस पर काम कर रही हैं और ब्रेन कम्प्यूटर इंटरफेस तैयार कर रही हैं। पिछले साल अप्रैल में मस्क ने एक फुटेज रिलीज कर इसका डेमो दिखाया था। वीडियो में उन्होंने दिखाया कि कैसे एक मेल मकाक (अफ्रीकी लंगूर) के दिमाग में चिप लगाई गई है और वह 'माइंड पॉन्ग' प्ले कर रहा है।

लंगूर को जॉयस्टिक मूव करने के लिए ट्रेंड जरूर किया गया था, लेकिन इस टेस्ट के दौरान उसके अनप्लग रखा गया था। मकाक पैडल को अपने दिमाग की मदद से कंट्रोल कर रहा था। हालांकि, उसे ऐसा लग रहा था कि वह जॉयस्टिक की मदद से ऐसा कर पा रहा है। 6G को लेकर अभी बहुत सी चीजें क्लियर नहीं है। भारत अभी 5G की लॉन्चिंग की तैयारी कर रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6G पर बताया था कि एक टास्ट फोर्स को तैयार किया गया है। इस साल के अंत तक हमें भारत में 5G टेक्नोलॉजी देखने को मिल जाएगी।