लोगों के मुंह और होठों के आसपास छाले और फूंसियां हो जाती है। जिसके बारे में कई तरह की भ्रम फैले हुए हैं। कहा जाता है कि किसी का झूठा खाने से यह फूंसिया हो जाती है। इसी तरह से एक और भ्रम है कि किसी चीज की घिन्न करने से यह फूंसियां हो जाती है। ऐसे कई तरह के भ्रम दुनिया में व्यापत है लेकिन सच यह है कि यह एक तरह से बीमारी होती है।  जिसका नाम हर्पीस है।
 

बता दें कि हर्पीस दो तरह के होते हैं- ओरल हर्पीस और जेनिटल हर्पीस। वायरस ज़्यादातर क्लोज कॉन्टैक्ट से होता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि  WHO की रिपोर्ट के मुताबिक ओरल हर्पीस दुनियाभर में 67 प्रतिशत लोगों को होता है और जेनिटल हर्पीस 11 प्रतिशत लोगों को होता है। इन्होंने आगे बताया कि हर्पीस इन्फेक्शन मुख्य तौर पर दो तरह का होता है जैसे-

टाइप 1- टाइप 1 का इन्फेक्शन फेशिअल क्लोज़ कॉन्टैक्ट से होता है।
टाइप 2- टाइप 2 जेनिटल कॉन्टैक से होता है।


हर्पीस उन लोगों को होता है जिनको पहले चिकनपॉक्स हो चुका होता है। ये वायरस डोर्मेंट स्टेट में नर्व एंडिंग में रहता है, जब पेशेंट की इम्युनिटी कम हो जाती है तो यही वायरस दोबारा से एक्टिव होकर उस नर्व के एरिया को इन्फेक्ट करता है। लक्षणों की बात करें तो स्किन रैशेज में फफोले जैसे होते हैं, उसके आसपास लाल रहता है, खुजली होती है। हर्पीस सिम्पलेक्स वायरस के इन्फेक्शन में फफोले होंठों के आसपास होंगे।


हर्पीस से बचाव का एक ही उपाय है, साफ सफाई। इम्युनिटी मजबूत रखना, जिसको हर्पीस है, उससे फिजिकल दूरी बनाए रखना। बता दें कि हर्पीस जॉस्टर इन्फेक्शन के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं। एंटी वायरल दवाइयां दी जाती हैं