बिहार के बाहुबली और राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के निधन के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल शुरू हो गई है। तिहाड़ जेल में बंद शहाबुद्दीन की कोरोना से निधन के बाद जब दिल्ली के आईटीओ कब्रिस्तान में उन्हें दफनाया गया तो जनाजे में शामिल लोगों ने लालू प्रसाद के परिवार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर शहाबुद्दीन के परिजनों के अलावा भारी संख्या में शहाबुद्दीन के प्रशंसक भी मौजूद थे। जो इस बात से नाराज थे कि शहाबुद्दीन को सीवान उनके पैतृक गांव की जगह दिल्ली में दफनाया गया।

जनाजे में शामिल प्रशंसकों ने प्रशासन से ज्यादा राज के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। लोगों का आरोप है कि तेजस्वी ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सीवान में सुपुर्द-ए-खाक करने का कोई दबाव नहीं बनाया जबकि मोहम्मद शहाबुद्दी के दम पर ही लालू यादव की राजद एमवाई समीकरण का दम भरती थी। वहीं अपने खिलाफ हुए नारेबाजी को लेकर तेजस्वी यादव ने प्रेस रिलीज जारी कर अपनी सफाई रखी। तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद यादव और उन्होंने खुद सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई, खूब दबाव भी बनाया लेकिन सरकार कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देकर सीवान ले जाने की अनुमति नहीं दी। तेजस्वी ने प्रेस रिलीज में सरकार की हठधर्मिता को जिम्मेदार ठहराया।

तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद यादव और उन्होंने खुद सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई, खूब दबाव भी बनाया लेकिन सरकार कोरोना प्रोटोकॉल का हवाला देकर सीवान ले जाने की अनुमति नहीं दी। तेजस्वी ने प्रेस रिलीज में सरकार की हठधर्मिता को जिम्मेदार ठहराया। यही नहीं तेजस्वी ने अपनी सफाई में ये भी कहा कि स्थानीय प्रशासन मोहम्मद शहाबुद्दीन को आईटीओ की जगह किसी दूसरे कब्रिस्तान में दफनाना चाहती थी। लेकिन उन्होंने दिल्ली के कमिश्नर से खुद बातकर दिल्ली आईटीओ कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक की अनुमति दिलाई।