मेघालय विधानसभा चुनाव में मायल्लिम सीट से लगातार दो बार जीतते आए कांग्रेसी उम्मीदवार रॉनी लिंग्दोह के सामने जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती है। इस सीट पर पिछले चुनाव में उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार तेलिनिया थंगखिव से टक्कर मिली थी। हालांकि इस बार तेलिनिया एसएसपीडीपी के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर चार निर्दलीय उम्मीद अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिसमें मून लिंग्दोह, बॉम्बर सिंह, कैम्पबैल मैनिक और रिकी सुलाही। वहीं बीजेपी ने इस सीट से कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। केएसएनएएम के बानसैलंग मजाब और पीडीएफ से हम्लैस्टन दोहलिंग भी चुनावी मैदान में हैं।


पिछले चुनाव (2008) की बात की जाए तो कांग्रेसी उम्मीदवार रॉनी लिंग्दोह ने निर्दलीय महिला उम्मीदवार तेलिनिया थंगखिव को 1798 वोट से हराया था। रॉनी को 8072 और तेलिनिया को 6274 वोट मिले थे। वहीं 2008 के चुनाव में भी रॉनी को ही जीत मिली थी। इस चुनाव में उन्होंने एनसीपी के उम्मीदवार प्यानसाही को 1416 वोट से पटखनी दी थी। रॉनी को 9130 तो वहीं प्यानसाही को 7714 वोट मिले थे। बता दें कि मायल्लिम सीट पर 9 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इसमें से सिर्फ रॉन के नेतृत्व में ही कांग्रेस को यहां से दो बार जीत मिली। वहीं दो बार निर्दलीय, दो बार एएसएल, एक बार एचपीडी, एसपीयू और एएसएलसी (एएम) के उम्मीदवार को इस सीट से जीत मिली थी।


शुरुआती चुनाव (1092) की बात की जाए तो यह सीट एएसएल के खाते में गई थी। एएचएल पार्टी के उम्मीदवार जॉरमानिक ने निर्दलीय उम्मीदवार फ्रैंसिस सयीम को 500 वोटों से हराया था। जॉरमनिक को 1921 तो वहीं सयीम को 1421 वोट मिले थे। हालांकि 1978 के चुनाव में एचपीडी के उम्मीदवार लैंमब्ररीन खरुखी ने जॉरमानिक को हराया। लैंमब्ररीन को 2078 को तवहीं जरमानिक को 1935 वोट मिले थे। जीत का अंतर महज 143 वोट का था। 1983 में एएचएल ने जॉरमानिक की जगह ऑरिस लिंग्दोह को टिकट दिया, जो कि उनके लिए फायदे का सौदा रहा। ऑरिस ने इस चुनाव को 335 वोट से जीत लिया। उन्हें 2943 तो वहीं पीडीसी के उम्मीदवार मोहन रॉय को 2608 वोट मिले थे।


1988 में ये सीट एचपीयू के खाते में गई, यहां से उनके उम्मीदवार डीएम रॉय 482 वोटों से ये चुनाव जीत लिया। यहां उनके सामने कांग्रेसी उम्मीदवार ऑरिस लिंग्दोह थे। ऑरिस ने इस सीट से पिछला चुनाव एएचएल के टिकट पर जीता था, लेकिन इस बार कांग्रेस का हाथ थामने का फैसला लगत साबित हुआ। डीएम रॉय को 2754 तो वहीं ऑरिस को 3754 वोट मिले। 1993 के चुनाव में एएचएलसी (एमएम) के प्यानसाही विजेता बने। उन्होंने कांग्रेसी उम्मीदवार ऑरिस को सर्वाधिक 4309 वोट से हराया। प्यानसाही को 8063 तो वहीं ऑरिस को 3754 वोट मिले। 1998 में प्यानसाही एक बार फिर इस सीट से विजेता बने। उन्होंने पीडीएम के उम्मीद साउंडर स्टॉन्ग काजी को 606 वोट से हराया। 2003 में प्यानसाही ने इस सीट से जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार ऑरिस को मात दी। प्यानसाही को 5632 तो वहीं ऑरिस को 3083 वोट मिले। जीत का अंतर 2549 वोट का हरा। बता दें कि मेघालय विधानसभा के लिए 27 फरवरी को चुनाव होंगे। वहीं तीन मार्च को परिणाम सामने आएंगे।