त्रिपुरा में सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 20 साल पहले हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के चार प्रचारकों की हत्या के केस को फिर से खोल दिया है। बीजेपी सरकार ने केस को ओपन करने के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने बताया, '20 साल पहले हुए  RSS प्रचारकों के हत्याकांड में हमने षड्यंत्र की शंका के आधार पर एसआईटी का गठन किया। मामले की जांच के लिए इंस्पेक्टर कमलेंदु भौमिक की अगुवाई में टीम गठित कर दी गई है।' 

वर्ष 1999 में नैशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने आरएसएस के चार प्रचारकों- श्यामलाल सेनगुप्ता (जोनल महासचिव), सुधामय दत्ता (अगरतला के एरिया इन्चार्ज), दिनेन्द्र नाथ डे (असम में प्रचारक) और शुभांकर चक्रवर्ती (जिला प्रचारक) का अपहरण कर लिया था, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। प्रचारक के मर्डर केस में आरएसएस की तरफ से कई बार स्वतंत्र जांच की मांग उठाई जा चुकी थी लेकिन प्रदेश में काबिज लेफ्ट फ्रंट की सरकार इस मांग को टालती रही।