आज चांदी की कीमतों में तेजी आई है। सोमवार को 59,843 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बंद हुई चांदी आज 191 रुपये बढ़कर 60,034 रुपये प्रति किलो (Silver price today) के स्तर पर खुली। शुरुआती कारोबार में ही चांदी ने 60,179 रुपये प्रति किलो का दिन का उच्चतम स्तर भी छू लिया, जबकि चांदी अपने ओपनिंग प्राइस के स्तर को तोड़ने में नाकाम साबित हुई। चांदी की कीमत ऑल टाइम हाई से करीब 18 हजार रुपये तक गिर चुकी है।

कमजोर मांग के कारण कारोबारियों ने अपने सौदों के आकार को कम किया। इससे वायदा बाजार में बुधवार को चांदी वायदा कीमत 131 रुपये की हानि के साथ 59,490 रुपये प्रति किलो रह गयी। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में चांदी के दिसंबर माह में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 131 रुपये यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,490 रुपये प्रति किलो रह गयी जिसमें 10,245 लॉट के लिये कारोबार हुआ। वैश्विक स्तर पर, न्यूयार्क में चांदी 0.60 प्रतिशत की हानि के साथ 23.27 डॉलर प्रति औंस रह गयी।
वैश्विक बाजार में बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में सुधार आने के बाद दिल्ली सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमत 45 रुपये की तेजी के साथ 48,273 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने यह जानकारी दी है। पिछले कारोबारी सत्र में सोने का भाव 48,228 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी की कीमत भी 407 रुपये की तेजी के साथ 59,380 रुपये प्रति किलोग्राम हो गयी। पिछले सत्र में इसका बंद भाव 58,973 रुपये प्रति किग्रा था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव लाभ के साथ 1,812 डॉलर प्रति औंस हो गया जबकि चांदी 23.34 डॉलर प्रति औंस पर लगभग अपरिवर्तित रही।
7 अगस्त 2020 वो दिन था जब सोने-चांदी ने एक नया रेकॉर्ड बनाया। सोने और चांदी दोनों ने ही अपना ऑल टाइम हाई छुआ। 7 अगस्त को सोने ने 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई का स्तर छुआ था, जबकि चांदी ने 77,840 रुपये प्रति किलो का स्तर छुआ था। सोना अब तक करीब 7700 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरा है, जबकि चांदी करीब 18 हजार रुपये प्रति किलो तक गिर चुकी है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंसियल सविर्सिज के जिंस शोध के उपाध्यक्ष नवनीत दमानी कहते हैं कि सोना ऊंचाई से गिरकर 50 हजार रुपये के दायरे में आया है, जबकि चांदी 60 हजार रुपये के दायरे में आ चुकी है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में भी उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। केडिया कैपिटल के डायरेक्टर अजय केडिया मानते हैं कि स्टिमुलस पैकेज ने शेयर बाजारों के लिए स्टेरॉयड का काम किया। इसी की वजह से शेयर बाजार में तेजी आई है, लेकिन इसे नेचुरल नहीं कहा जा सकता।