उच्चतम न्यायालय ने सिक्किम के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रेम सिंह तमांग की नियुक्ति को रद्द करने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर शुक्रवार को केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा। दरअसल,याचिका के जरिए उनकी नियुक्ति इस आधार पर रद्द करने की मांग की गई है कि वह इस पद के लिए योग्य नहीं हैं क्योंकि अतीत में एक सरकारी सेवक के तौर पर कोष के गबन को लेकर उन्हें दोषी ठहराया गया था।


प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने तमांग को इस आधार पर नोटिस भी जारी किया कि भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया गया कोई भी व्यक्ति निर्वाचन कानून के मुताबिक अपनी दोषसिद्धि की तारीख से छह साल की अवधि तक आयोग्य रहेगा। शीर्ष न्यायालय ने तमांग के कोई बड़ा फैसला लेने या राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर अहम शासनिक कार्य करने पर रोक लगाने की मांग करने वाली एक याचिका पर भी जवाब मांगा है।


राज्य में 25 साल शासन करने वाली सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट पार्टी के बिमल डी शर्मा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि  तमांग 2024 तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता जीवी राव के मार्फत दायर की गई याचिका में कहा गया है कि फिर भी तमांग को न सिर्फ चुनाव की इजाजत दी गई, बल्कि उन्हें सिक्किम का मुख्यमंत्री भी गलत तरीके से चुना गया जबकि वह चुनाव लड़ने के लिए आयोग्य थे।


याचिका में कहा गया है कि तमांग को 9, 50, 000 रुपए के गबन के आरोप में दोषी ठहराया गया था।