कांग्रेस के सीनियर कपिल सिब्बल ने गांधी परिवार को पार्टी के नेतृत्व से अलग होने को कहा है। उन्होंने कहा कि यह सही समय है जब गांधी परिवार से कांग्रेस की लीडरशिप से हट जाना चाहिए और नेतृत्व की भूमिका के लिए और किसी अन्य व्यक्ति को मौका देना चाहिए। सिब्बल का यह बयान पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार और कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से सोनिया गांधी के नेतृत्व में अपना विश्वास दिखाने के बाद आया है। 

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कपिल सिब्बल ने विचार-मंथन सत्र आयोजित करने के पार्टी के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नेतृत्व "कुकू लैंड" में रह रहा है, अगर उसे आठ साल बाद भी पार्टी के पतन के कारणों के बारे में पता नहीं है। जी23 नेताओं ने 2020 में सोनिया गांधी को पार्टी में बड़े बदलावों की मांग की थी। सिब्बल कांग्रेस के पहले वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने मांग की कि गांधी परिवार एक नए नेता के लिए रास्ता बनाए। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार को स्वेच्छा से दूर जाना चाहिए, क्योंकि उनकी ओर से नामित बॉडी उन्हें कभी नहीं बताएगी कि उन्हें सत्ता की बागडोर जारी नहीं रखनी चाहिए।

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सिब्बल ने कहा कि वह न तो विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार से हैरान हैं और न ही सीडब्ल्यूसी के सोनिया गांधी के नेतृत्व में विश्वास दिखाने के फैसले से। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी के बाहर बड़ी संख्या में नेताओं का दृष्टिकोण पूरी तरह से अलग है। उन्होंने कहा, "सीडब्ल्यूसी के बाहर एक कांग्रेस है... कृपया उनके विचारों को सुनें। अगर आप चाहें तो... हमारे जैसे बहुत से नेता जो सीडब्ल्यूसी में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस में एक पूरी तरह से अलग दृष्टिकोण है। क्या आपको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि हम सीडब्ल्यूसी में नहीं हैं?"

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कांग्रेस नेता ने कहा, "उनके अनुसार सीडब्ल्यूसी भारत में कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करती है। मुझे नहीं लगता कि यह सही है। देश भर में बहुत सारे कांग्रेसी हैं... केरल से, असम से, जम्मू-कश्मीर से, महाराष्ट्र से, उत्तर प्रदेश से, गुजरात से, जो इस तरह की राय नहीं रखते हैं। मैं दूसरों की ओर से बात नहीं कर सकता। यह मेरा निजी विचार है कि आज कम से कम मुझे 'सब की कांग्रेस' चाहिए। कुछ अन्य 'घर की कांग्रेस' चाहते हैं। मैं निश्चित रूप से 'घर की कांग्रेस' नहीं चाहता। और मैं अपनी आखिरी सांस तक 'सब की कांग्रेस' के लिए लड़ूंगा।"