भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पृथ्वी की निगरानी करने वाले उपग्रह 'ईओएस-03' की लॉन्चिंग का मिशन पूरा नहीं हो पाया। लॉन्चिंग के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपण के बाद सैटेलाइट ने दो चरण सफलतापूर्वक पूरे किए। लेकिन 18 मिनट के बाद क्रायोजेनिक इंजन में तकनीकी गड़बड़ी आ गई। क्रायोजेनिक इंजन से आंकड़े मिलने बंद हो गए। इसके कुछ देर बाद इसरो ने मिशन के पूरा नहीं होने की घोषणा की।

लॉन्चिगं के बाद इसे जीएसएलवी (भूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान)-एफ10 द्वारा जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था। यह सैटेलाइट 10 साल तक सेवाएं देता। इससे पहले बुधवार को इसके प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी। GLSV-F10 रॉकेट के क्रायोजेनिक इंजन में लिक्विड ऑक्सिजन भरने का काम पूरा हो चुका है।

अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (ईओएस) की मुख्य विशेषता यह है कि यह चिन्हित किये गए किसी बड़े क्षेत्र क्षेत्र की वास्तविक समय की छवियां लगातार अंतराल पर भेजता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदाओं के साथ-साथ किसी भी तरह की अल्पकालिक घटनाओं की त्वरित निगरानी में मदद करेगा। यह उपग्रह कृषि, वानिकी, जल निकायों के साथ-साथ आपदा चेतावनी, चक्रवात निगरानी, बादल फटने या आंधी-तूफान की निगरानी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रयोग लाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देगा।

इस सैटेलाइट की मदद से देश की सीमाओं पर नजर रखने में भी आसानी होगी। साथ ही जंगलों की आग, देश में हरियाली की स्थिति, फसलों के हालात और तमाम तरह की जानकारी मिल सकेगी। इससे संसाधनों का प्रबंधन आसान व बेहतर हो सकेगा। आपदा की स्थिति में जरूरी इंतजाम करने के साथ ही राहत और बचाव कार्यों में भी मदद मिलेगी।

फरवरी में ब्राजील के भू-अवलोकन उपग्रह एमेजोनिया-1 और 18 अन्य छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के बाद 2021 में इसरो का यह दूसरा प्रक्षेपण होगा। गुरुवार को होने वाला यह प्रक्षेपण मूल रूप से इस साल अप्रैल या मई में ही होना था लेकिन कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के चलते इसे टाल दिया गया था।