सुप्रीम कोर्ट ने 18-44 आयु वर्ग के लिए अपनी टीकाकरण नीति को लेकर केंद्र को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लाभार्थियों को टीकों के लिए भुगतान करने के लिए कहने की केंद्र की नीति “प्रथम दृष्टया मनमाना और तर्कहीन” है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को "उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए अपनी टीकाकरण नीति की एक नई समीक्षा करने" का निर्देश दिया है।

यह आदेश सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, एल नागेश्वर राव और एस रवींद्र भट की बेंच ने पारित किया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से "31 दिसंबर 2021 तक टीकों की अनुमानित उपलब्धता का रोडमैप रिकॉर्ड पर रखने" के लिए कहा है। कोर्ट मामले की अगली सुनवाई 30 जून को करेगा।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिया है कि “18-44 आयु वर्ग के व्यक्तियों के टीकाकरण के महत्व के कारण, पहले 2 चरणों के तहत समूहों के लिए स्वयं नि: शुल्क टीकाकरण करने के लिए केंद्र सरकार की नीति, और इसे राज्य / केंद्रशासित प्रदेश सरकारों और निजी अस्पतालों द्वारा भुगतान किए गए टीकाकरण के साथ बदलना। 18-44 वर्ष के बीच के व्यक्तियों के लिए, प्रथम दृष्टया, मनमाना और तर्कहीन है ”।