मुंबई. शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे की ओर से महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि सीताराम जिरवाल द्वारा उन्हें और 15 अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के नोटिस के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे शीर्ष अदालत में शिंदे गुट की ओर से पेश हुए. वहीं, अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में उद्धव कैंप का पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर को नोटिस जारी करते हुए सभी दस्तावेजों को कोर्ट में जमा करने के निर्देश दिये.

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महाराष्ट्र राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने खिलाफ शिंदे गुट द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने और 16 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्रवाई शुरू करने को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर नरहरि सीताराम जिरवाल को नोटिस जारी किया है और सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया है.

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इस बीच महाराष्ट्र राजनीतिक संकट को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में एकनाथ शिंदे, शिवसेना के बागी विधायकों, मंत्रियों को तुरंत राज्य में लौटने और कर्तव्यों का निर्वहन करने का निर्देश देने की मांग की गई है. याचिका में कर्तव्यों पालन में चूक के लिए बागी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है.

मामले में अगली सुनवाई 11 तारीख को होगी

शिंदे गुट की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर नरहरि सीताराम जिरवाल और विधायकों के अल्पसंख्यक समूह द्वारा शिवसेना? विधायक दल के नेता चुने गए अजय चौधरी को नोटिस जारी किया है. अदालत ने डिप्टी स्पीकर को सभी दस्तावेज कोर्ट में जमा कराने का निर्देश दिया है. सभी पक्षों को तीन दिन में जवाब देना है और हालानामा दाखिल करना है. मामले में अगली सुनवाई 11 तारीख को होगी.

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डिप्टी स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव नोटिस को खारिज कर दिया, क्योंकि प्रामाणिकता सत्यापित नहीं थी- राजीव धवन

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पीकर के लिए सदन के सामने विधायकों को 14 दिन का नोटिस देने का समय है. यहां विधायकों को नोटिस देकर अनुच्छेद 179 के तहत प्रस्ताव पेश करने का आह्वान किया गया है. डिप्टी स्पीकर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि डिप्टी स्पीकर ने अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया, क्योंकि इसकी प्रामाणिकता सत्यापित नहीं थी.