अपने विवादित बयानों के लिए चर्चित भाजपा विधायक शिलादित्य देव अब असम साहित्य सभा के सवालों के घेरे में आ गए हैं। साहित्य सभा ने उनसे नागरिकता कानून संशोधन विधेयक पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साहित्य सभा के अध्यक्ष परमानंद राजबंशी ने शिलादित्य के बयानों पर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि एेसे समय में जब बंगाली संगठन साहित्य सभा के आह्वान पर बंगाली गण समावेश रद्द करने पर सहमति जता रहे हैं तो शिलादित्य इस तरह का सांप्रदायिक बयान क्यों दे रहे हैं। इसके पहले 26 बंगाली संगठनों के सम्मिलित मंच सिटीजन राइट प्रोटेक्शन फोरम, असम ने आगामी 17 नवंबर को गुवाहाटी के खानपाड़ा में आहूत गण समावेश रद्द करने की घोषणा की थी।

असम साहित्य सभा ने उसके पहले बंगाली संगठनों से बंगाली गण समावेश नहीं करने का आह्वान किया था। राजवंशी के मुताबिक शिलादित्य को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। वह विधेयक के समर्थन में हैं या विरोध में। मैत्री सम्मेलन आयोजित होने के पहले विधायक शिलादित्य को किसी भी संगठन के खिलाफ गैर- जिम्मेदार बयान नहीं देना चाहिए।

बंगाली संगठनों के मंच ने असम साहित्य सभा के साथ बैठक के बाद उक्त विशाल मैत्री सम्मेलन आयोजित करने और उस दौरान विधेयक को लेकर अपना रुख सबके सामने रखने पर सहमति जताई।

नागरिकता कानून संशोधन विधेयक, 2016 को लेकर ब्ह्मपुत्र और बराक घाटी के अधिसंख्य लोगों में अलग-अलग विचार हैं। विगत 23 अक्टूबर को राज्य के 46 से अधिक संगठनों ने विधेयक के खिलाफ 12 घंटे का असम बंद किया था।