नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उत्कृष्ट सेवा के लिए प्रदान किए जाने वाले पुलिस सेवा मेडल से शेख अब्दुल्ला की तस्वीर हटाने का फैसला लिया है। हालांकि, इस फैसले पर नेशनल कॉन्फ्रेंस भड़क गई है और इसे गलत फैसला बताया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि यह फैसला जम्मू-कश्मीर के इतिहास को मिटाने की कोशिश है, लेकिन वह शेख अब्दुल्ला हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे। सोमवार को ही इस संबंध में गृह मंत्रालय की ओर से आदेश दिया गया था और अब जम्मू-कश्मीर पुलिस सेवा मेडल्स में शेख अब्दुल्ला की बजाय भारत के राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ को उकेरा जाएगा। 

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, 'राष्ट्रीय चिह्न के प्रति पूरा सम्मान व्यक्ति करते हुए मैं कहना चाहूंगा कि सरकार ने इतिहास, पहचान और हमारे नायकों की पहचान को मिटाने की कोशिश के तहत ही यह कदम उठाया है।' डार ने कहा कि नामों को हटाने से कुछ भी नहीं बदलेगा बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख अब्दुल्ला हमेशा लोगों के दिलों पर राज करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर के लोग जहां भी हैं, उसके लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया है। उन्होंने हमेशा ही तानाशाही और उत्पीड़न के खिलाफ जंग लड़ी है। इसे कोई भी बदल नहीं सकता। नाम बदलकर या उनके स्थान पर कुछ और लाकर इसे बदला नहीं जा सकता। 

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उन्होंने कहा कि शेख अब्दुल्ला हमेशा लोगों के दिलों में रहेंगे। भले ही जम्मू कश्मीर का प्रशासन और उनके आका कुछ भी फैसला ले लें। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने आदेश दिया है कि पुलिस सेवा मेडल में अब शेख अब्दुल्ला की तस्वीर नहीं होगी बल्कि अशोक स्तंभ बना होगा। यही नहीं अब इसका नाम भी शेर-ए-कश्मीर पुलिस मेडल नहीं होगा बल्कि जम्मू एवं कश्मीर पुलिस मेडल होगा। इस फैसले का भाजपा समेत कई संगठनों ने स्वागत किया है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विरोध किया है। शेख अब्दुल्ला नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक थे और कश्मीर के मुख्यमंत्री भी थे।