दिल्ली विश्वविद्यालय के भू-गर्भ वैज्ञानिकों को राजस्थान के बाड़मेर जिले में बड़े पैमाने पर शार्क के जीवाश्म मिले हैं। ये जीवाश्म इस बात का प्रमाण हैं कि करीब 58 मिलियन साल (5.5 करोड़ साल ) पहले बाड़मेर समुद्र के नीचे रहा होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें कई तरह की शार्कों के जीवश्म मिले हैं। विशेषज्ञों को बाड़मेर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किमी दूर गिरल लिग्नाइट खदान के पास ये जीवाश्म मिले हैं। 

दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग की शोधकर्ता प्रियदर्शनी राजकुमारी और प्रो. जीवीआर प्रसाद का कहना है कि लगभग 58 मिलियन साल पुरानी पेलियोसीन चट्टानों में जीवाश्म पाए गए थे। प्रो. प्रसाद का कहना है कि दांतों के आधार पर शोधकर्ताओं ने क्षेत्र में मौजूद नौ विभिन्न प्रकार के शार्क की पहचान की है। शार्क के पूर्ण कंकाल नहीं पाए हैं। क्योंकि आमतौर पर यह दांत, रीढ़ ही जीवाश्म के रूप में संरक्षित होते हैं। हालांकि शार्क के जीवाश्म बाड़मेर क्षेत्र से पहले भी देखे गए हैं, लेकिन उन रिपोर्टों ने उथले समुद्री और मीठे पानी की प्रजातियों के एक साथ होने के संकेत दिए हैं, लेकिन इस शोध से ये पता चलता है कि लगभग 58 मिलियन वर्ष पहले इस क्षेत्र में पूरी तरह से समुद्री वातावरण मौजूद था और पानी की गहराई 15 से 20 मीटर के बीच थी। इस अध्ययन ने लाखों साल पहले गर्मी, आद्र्र तटीय परिस्थितियों, जलवायु परिस्थितियों के संदर्भ में पर्यावरणीय परिवर्तनों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान की है।

उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका और दक्षिणी उत्तरी अमरीका से नाता

शोधकर्ताओं का कहना है कि इसी तरह के जीवाश्म उत्तर पश्चिमी अफ्रीका के मोरक्को, नाइजर, नाइजीरिया, टोगो, यूरोप, इंग्लेंड, फ्रांस, बेल्जियम और दक्षिणी उत्तरी अमरीका में पहले मिल चुके हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि भारत के इन क्षेत्रों और उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बीच मुक्त फ्यूनल इंटरचेंज होंगे। दिल्ली के वैज्ञानिकों का यह शोध जियोबॉयोस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

जैसलमेर में भी मिल चुके हैं जीवाश्म

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में समुद्र होने के प्रमाण मिले हैं। इससे पहले भी वर्ष 2018 में जैसलमेर के सुल्ताना गांव और बांधा गांव में वैज्ञानिकों ने बड़ी संख्या में करीब 4.7 करोड़ साल पुराने जीवाश्म खोजे थे। इनमें आदिकालीन व्हेल और शार्क के दांत, मगरमच्छ के दांत और कछुए की हड्डियोंं के जीवाश्म मिले थे, जो इस बात का प्रमाण हैं कि कभी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में समुद्र होगा, जो बाद में जलवायु परिवर्तन के कारण रेगिस्तान में परिवर्तित हो गया।