सीरिया में आईएस आतंकवादी के साथ विवाह करने के लिए सात वर्ष पहले भागी ब्रिटिश नागरिक शमीमा बेगम ने ब्रिटिश लोगों से माफी मांगते हुए कहा है कि वह अपने देश आकर आतंकवाद के सभी मामलों का सामना करने को तैयार है। इस मामले में ब्रिटिश सरकार ने बाद में उसकी नागरिकता छीन ली थी। 

शमीमा बेगम ने मैं ब्रिटिश लोगों से अपने को माफ करने के लिए कह रही हूं । मैंने बहुत ही कम उम्र में एक बड़ी गलती की थी और उस उम्र के अधिकतर बच्चों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है। इस आयु में अधिकतर बच्चे भ्रमित होते हैं और वे आसानी से इस तरह की चीजों के झांसे में आकर आसानी से बेवकूफ बन जाते हैं। 

शमीमा जिस वक्त ब्रिटेन से सीरिया भागी थी उस वक्त उसकी आयु मात्र 15 वर्ष थी और अब वह 22 वर्ष की हो चुकी है लेकिन सीरिया के एक शिविर में कैदी का जीवन बिता रही है। शमीमा ने हालांकि यह भी कहा कि वह जानती है कि ब्रिटिश लोगों के लिए उसे माफ करना बहुत कठिन होगा। उसने इस बात से इनकार किया कि वह आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थी और यह दावा भी किया कि वह केवल इसलिए सीरिया गई थी क्योंकि वह सोचती थी कि एक मुस्लिम लड़की होने के नाते वह उस समय बिल्कुल सही थी। उसने कहा कि मैं किसी तरह की हिंसक गतिविधियों में शामिल होनेे के लिए नहीं गई थी और मैं वहां एक आईएस लड़ाके के प्यार में पड़ कर उससे विवाह करने के लिए गई थी। एक रिपोर्टर ने वर्ष 2019 में जब उसका इसी कैदी शिविर से इंटरव्यू लिया था तो उस वक्त उसने कहा था कि एक जिहादी के साथ शादी करने के लिए सीरिया आने में उसे कोई पछतावा नहीं हैं। 

इस कबूलनामे के बाद ब्रिटिश सरकार ने उसकी ब्रिटिश नागरिकता को समाप्त कर दिया था। ब्रिटिश सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2020 में नागरिकता समाप्त करने के ब्रिटिश सरकार के फैसले को सही ठहराया था और यह कहा था कि वह अपने नागरिकता संबंधी केस को लड़ने के लिए अपनी जन्मभूमि नहीं लौट सकती है। उसने ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जानसन से भी उसे स्वदेश लौटने की अनुमति देने की मांग करते हुए कहा है ‘आतंकवाद के खिलाफ लडाई में मैं बेहद मददगार साबित हो सकती हूं क्योंकि साफ स्पष्ट रूप से पता ही नहीं है कि आप क्या कर रहे हैं।’’