सीनियर सिटिजन (Senior citizens) के आय के स्त्रोत सीमित होते हैं इसे देखते हुये सामान्य टैक्सपेयर्स के मुकाबले कई सारी टैक्स से जुड़ी रियायतें (Income tax exemption) दी जाती है।  एक निश्चित सीमा तक आयकर में छूट तो मिलती ही है, साथ ही कई तरह के डिडक्शन के फायदे भी मिलते हैं।  इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिये भी उन्हें कुछ सुविधा दी जाती है आईए जानते हैं ऐसे ही टैक्स बेनेफिट्स के बारे में जो सीनियर सिटिजन के लिये है। 

मौजूदा समय में सामान्य टैक्सपेयर्स को 2.5 लाख रुपये के इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है।  लेकिन सीनियर सिटीजन के लिये ये सीमा 3 लाख रुपये हैं।  यदि 3 से 5 लाख रुपये के इनकम पर कोई टैक्स बना तो 87ए (under 87A) के तहत टैक्स रिबेट मिलता है। वहीं 80 साल से ज्यादा उम्र के सीनियर सिटिजन्स को 5 लाख रुपये (income up to Rs 5 lakh)  तक की आय पर टैक्स छूट हासिल है। 

ज्यादातर सीनियर सिटीजन ऐसी जगह निवेश करते हैं जो सुरक्षित हो।  फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed deposit) उनके लिये निवेश का सबसे बेहतर जरिया है।  उसमें निवेश कर उन्हें ब्याज के रुप में फिक्स रकम मिलती है जिससे उनकी आय बढ़ती है।  ऐसे में सीनियर सिटिजन को (senior citizens get tax exemption on income) एक वित्त वर्ष में 50 हजार रुपये तक की आय पर टैक्स छूट मिलती है।  अगर इससे ज्यादा ब्याज से कमाई हुई तो उन्हें अतिरिक्त ब्याज पर टैक्स चुकाना पड़ता है।  सामान्य टैक्सपेयसज़् के लिये ये सीमा 10 हजार रुपये प्रति वर्ष है। 

सीनियर सिटीजन को स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा खर्च करना पड़ता है।  ऐसे में इंश्योरेंस के जरिये वे भार मुक्त हो सकते हैं।  इसलिये एक वित्त वर्ष में 50 हजार रुपये तक के मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर सीनियर सिटीजन डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं।  

सीनियर सिटिजन को ये डिडक्शन आयकर अधिनियम के तहत मिलता है।  50 हजार रुपये तक के डिडक्शन का ये फायदा सिर्फ सीनियर सिटिजन ही नहीं, बल्कि बाकी टैक्सपेयर्स भी ले सकते हैं जो अपने सीनियर सिटिजन माता पिता का मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं। 

वृद्धावस्था में स्वास्थ्य पर खर्च काफी बढ़ जाता है। सीनियर सिटीजन का इलाज में जो खर्च होता है उस पर भी टैक्स छूट का फायदा लिया जा सकता है।  आयकर अधिनियम के तहत सीनियर सिटिजन 1 लाख रुपये तक के मेडिकल खर्च पर डिडक्शन का फायदा ले सकते हैं। लेकिन इसके लिये जरुरी है भुगतान नगद में नहीं बल्कि नेट बैकिंग, डेबिट-क्रेडिट कार्ड या चेक से किया गया हो। 

सभी टैक्सपेयर्स के लिये इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करना जरूरी है, लेकिन सीनियर सिटिजन को इसमें भी रियायत दी जाती है।  आयकर अधिनियम के तहत सीनियर सिटिजन चाहे तो ऑफलाइन भी आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। दरअसल, ये सुविधा इसलिए दी जाती है, ताकि जिन सीनियर सिटिजन को ऑनलाइन आईटीआर भरने में असुविधा होती है वे ऑफलाइन रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।