सडक़ों पर संतरा बेचकर स्कूल बनाने वाले और भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री (padma shri) से सम्मानित एक साधारण व्यक्ति हरेकला हजब्बा (harekala hajabba) का मंगलवार को अपने गृह नगर मंगलुरु लौटने पर एक नायक की तरह स्वागत किया गया। पूरे देश ने 65 वर्षीय हजब्बा को उनके योगदान के लिए सलाम किया और सोमवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) से सम्मान प्राप्त करने के लिए मंच की ओर नंगे पांव चलने की उनकी विनम्रता की सराहना की।

उनके स्वागत के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग मंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे (Mangaluru International Airport) पर जमा हुए। जैसे ही वह उतरे और लॉबी से बाहर निकले, उनके प्रशंसकों ने उन्हें घेर लिया और नारे और ताली के बीच गुलदस्ते और शॉल देकर उनका अभिनंदन किया। हजब्बा सैकड़ों लोगों को उनकी सराहना करते हुए देखकर दंग रह गए। उन्हें सरकारी वाहन से उनके आवास तक ले जाया गया।

हजब्बा सम्मानित होने के बाद भी लोगों का दिल जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, उन्होंने मंगलुरु के पास अपने गांव के लिए एक पीयू कॉलेज बनवाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से पद्म श्री पुरस्कार प्राप्त करना सम्मान की बात है और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) से हाथ मिलाने पर खुशी भी व्यक्त की। उन्होंने एक स्कूल बनाने का सपना देखा था और संतरे बेचने से होने वाली मामूली आय का एक हिस्सा अलग रखा था। उनके पिता एक रेत खनिक थे, जबकि उनकी मां बीड़ी बनाती थीं। हजब्बा, (जो अभी भी संतरे बेचता है) ने स्कूल बनाने का फैसला किया था। हजब्बा ने फल बेचकर रोजाना 75 रुपये कमाए और पांच लोगों के परिवार का घर का खर्च भी संभाला। इसके बावजूद, उन्होंने पैसे बचाने में कामयाबी हासिल की और स्थानीय लोगों और एक मदरसा कमेटी की मदद से 2001 में स्कूल बनाया।