छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस जीपी सिंह के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।  कल ;'र रात एसीबी ने रायपुर के कोतवाली थाने में मामला दर्ज करवाया है।  छापे के दौरान जीपी के घर से कुछ चि_ियां मिली थीं, जिसमें सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप है।  फिलहाल, जीपी सिंह गायब हैं। 

दरअसल, एक जुलाई को जीपी सिंह के रायपुर स्तिथ घर और उनके 15 ठिकानों पर एसीबी ने छापे मारे थे।  उस दौरान जीपी सिंह के घर से कई लेटर्स  और पेनड्राइव बरामद किए गए थे, जिसमें सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रचने के सबूत एसीबी को मिले थे।  इसके बाद जीपी सिंह के खिलाफ कल रात 12 बजे रायपुर के कोतवाली थाने में राजद्रोह और समाज में वैमनस्य फैलाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया। 

वहीं, मंगलवार को खबर सामने आई थी कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 1994 बैच के आईपीएस जीपी सिंह को सस्पेंड कर दिया है।  गृह विभाग ने बीते सोमवार की देर शाम जीपी सिंह के निलंबन का आदेश जारी किया।  आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी की कार्रवाई के बाद गृह विभाग ने ये आदेश जारी किया है।  बीते 1 जुलाई की सुबह जीपी सिंह के रायपुर निवास सहित 15 ठिकानों पर एसीबी ने छापामार कार्रवाई की थी।  यहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ ही नगर, जेवरात व बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ था।  जीपी सिंह के कुछ लोगों के साथ कारोबारी ताल्लुकात के भी प्रमाण मिलने के दावे किए जा रहे हैं। 

जेवरात बरामद करने का दावा किया गया है

छत्तीसगढ़ में साल 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जीपी सिंह को एसीबी और इओडब्ल्यू का प्रमुख बनाया गया था।  तब ये माना जा रहा था कि वे सरकार के करीबी हैं, लेकिन इस बीच लगातार शिकायतों का हवाला देकर उन्हें पद से हटा दिया गया।  आरोप लगे हैं कि एसीबी चीफ रहते जीपी सिंह ने छापे का डर दिखाकर लोगों से अवैध वसूली की और उस रकम को सेल कंपनियों में लगाया।  जीपी सिंह के ठिकानों से करीब 10 करोड़ रुपयों के बेनामी संपत्ति, कैश व जेवरात बरामद करने का दावा किया गया है।