एक जाबांज पुलिस अधिकारी को खोने के बाद सुरक्षा बलों ने असम अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर प्रतिबंधित संगठन अल्फा (स्वाधीन) के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ दिया है। इसमें असम पुलिस, सेना, सीआरपीएफ, कोबरा कमांडो को लगाया गया है। मालूम हो कि हाल में तिनसुकिया दौरे के दौरान राज्यपाल जगदीश मुखी ने दावा किया था कि अल्फा के गढ़ के रूप में पहचाने जाने वाले तिनसुकिया जिले में संगठन की ताकत न के बराबर बची है। वहीं बीते शुक्रवार की घटना ने इसे गलत साबित कर दिया। 

जिले के बरडुमसा थाना इलाके के कुजुपथार में सुरक्षा बलों एवं अल्फाईयों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में बरडुसमा थाना प्रभारी शहीद हो गए थे। अल्फाइयों को कितना नुकसान पहुंचा है, अभी इसकी जानकारी नहीं है। वहीं राज्य के पुलिस महानिदेशक कुलधर सइकिया ने घटनास्थल का दौरा किया। सइकिया के अनुसार तिनसुकिया जिले के असम अरुणाचल प्रदेश सीमावर्तीय क्षेत्र में अब भी उग्रवादी सक्रिय है। डीजीपी ने कहा कि यह अल्फाईयों का नहीं, बल्कि अल्फाईयों के खिलाफ पुलिस का अभियान था, जिसमें हमारा एक जाबांज अधिकारी शहीद हो गया। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

 तिनसुकिया पुलिस के अनुसार  रूपम असम एवं जान असम के नेतृत्व में अत्याधुनिक हथियारों से लैस अल्फाइयों का दल कुजुपथार निवासी रंजन बरा के घर में पनाह लिए हुए था। अभियान के दौरान भास्कर कलिता बुलेट  प्रुफ जकैट पहने हुए थे। इसके बावजूद गोली उनके सीने में लगी, जिस पर आश्चर्यव्यक्त किया जा रहा है। वहीं कुजुपथार अंचल के तराणी वनांचल, पेंगेरी, बरडुमसा के साथ असम अरुणाचल प्रदेश सीमावर्तीय क्षेत्र में अल्फाइयों की खोज में पुलिस ने अभियान चला रखा है। उल्लेखनीय है कि लंबे अर्से से रुपम असम, जान असम जैसे कट्टर अल्फाइयों के नेतृत्व में एक दल तिनसुकिया जिले के असम अरुणाचल प्रदेश सीमावर्तीय क्षेत्र में सक्रीय है। कई बड़ी वारदात को अंजाम देने के बावजूद भी यह सुरक्षाबलों की पकड़ से दूर है।