समय-समय पर पृथ्वी की ओर आने वाले उल्कापिंड से जुड़ीं खबरें अखबारों में सुर्खियां बटोरती रहती हैं। वायुमंडल में दाखिल होने और पृथ्वी से टकराने का खौफ हमेशा ही वैज्ञानिकों के साथ लोगों को भी सताता रहता है, लेकिन अब वैज्ञानिक इससे निजात पाने की दिशा में जुट गए हैं।

अमरीकी वैज्ञानिक अब इन उल्कापिंडों को पृथ्वी की कक्षा से दूर भेजने के लिए वैकल्पिक तरीके पर काम कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि कुछेक मामलों में परमाणु हथियार के इस्तेमाल का विकल्प गैर परमाणु हथियार से बेहतर रहेगा। जानकारी के मुताबिक अमरीका के लारेंस लिवरमूर राष्ट्रीय प्रयोगशाला के वैज्ञानिक अमरीकी वायुसेना के तकनीकी विशेषज्ञों के साथ इस दिशा में काम कर रहे हैं। टीम के सदस्य लांसिंग होरान के मुताबिक परमाणु विस्फोट के बाद होने वाले न्यूट्रान रेडिएशन की मदद से लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 

एक्सरे की तुलना में न्यूट्रान भीतर तक घुस सकते हैं। अपनी अवधारणा को समझाते हुए उन्होंने कहा कि न्यूट्रान उल्कापिंड की सतह पर मौजूद मैटीरियल को ज्यादा मात्रा में गरम कर सकता है। इससे एक्सरे की तुलना में न्यूट्रान उल्कापिंड को पृथ्वी की कक्षा से हटाने में प्रभावी हो सकता है। उल्कापिंड के पृथ्वी से टकराने से रोकने के लिए दो तरीकों पर विचार किया जा रहा है। पहले तरीके में ऊर्जा के जबर्दस्त हमले से उल्कापिंड को कई टुकड़ों में तब्दील कर दिया जाए। दूसरा तरीका यह है कि ऊर्जा के इस्तेमाल से उल्कापिंड के रास्ते को ही बदल दिया जाए।

वैज्ञानिक के अनुसार जब पृथ्वी की ओर आ रहा उल्कापिंड छोटा होगा और टकराने के दौरान कम समय बचेगा तब उल्कापिंड को टुकड़ों में बदलने के विकल्प पर गौर किया जाएगा। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का मानना है कि आने वाले 100 साल में 22 ऐसे उल्कापिंड हैं जिनके पृथ्वी से टकराने की आशंका है। यदि किसी तेज रफ्तार स्पेस ऑब्जेक्ट के पृथ्वी से 46.5 लाख मील से करीब आने की आशंका होती है तो उसे अंतरिक्ष एजेंसियां खतरनाक मानती हैं।