मशीनी रोबोट से एक कदम आगे बढ़ते हुए वैज्ञानिकों ने अब जिंदा रोबोट की अवधारणा को सच कर डाला है। मेढ़क की कोशिकाओं का इस्तेमाल कर इस जिंदा रोबोट को तैयार किया गया है। इस सफलता के पीछे अमरीका की टुफ्ट्स और वेरमोंट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का हाथ है। जेनोबोट्स नामक यह रोबोट बॉयोलॉजिकल रोबोट का एडवांस वर्जन है जो पिछले साल अस्तित्व में आया था। खास बात यह है कि नया रोबोट अपने कलपुर्जे खुद बदलने में सक्षम है। साथ ही मेमोरी के मामले में भी इस रोबोट का कोई मुकाबला नहीं।

मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक यह छोटा सा रोबोट कई काम एक साथ कर सकता है। इधर-उधर चलने के अलावा यह रोबोट साथी रोबोट्स के साथ मिलकर किसी भी काम को अंजाम दे सकता है। नए रोबोट में कई नए इनोवेशन किए गए हैं। तैरने में सक्षम यह रोबोट कई एकल कोशिकाओं को एकजुट करके अपना शरीर बना सकता है। जर्नल साइंस रोबोटिक्स में प्रकाशित शोध के अनुसार पुराने रोबोट के मुकाबले में यह तेज और क्षमतावान है। इसकी याददाश्त कितनी तेज है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि यह हर वो घटना याद रख सकता है जो इसके साथ घटी हो। नए रोबोट्स का जीवनकाल भी पुराने वर्जन की तुलना में कहीं ज्यादा बताया जा रहा है।

रोबोट के इस वर्जन के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसको और अपग्रेड किया जा सकता है ताकि वक्त पडऩे पर इसकी क्षमताओं में विस्तार किया जा सके। पर्यावरण सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए इन जिंदा रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन रोबोट से यह भी पता चल सकता है कि कैसे मनुष्य की तरह से मेढक़ की कोशिकाएं एक शरीर का निर्माण करती हैं और एक सिस्टम के रूप में काम करती हैं।