सावन का पावन माह जल्द ही समाप्त होने जा रहा है। 22 अगस्त को सावन माह का अंतिम दिन है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शंकर को समर्पित होता है। इस महीने में विधि- विधान से भगवान शंकर की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। सावन में भगवान शंकर को प्रसन्न कर सभी तरह के दोषों से मुक्ति मिल जाती है। भगवान शंकर की कृपा से शनि दोषों से  भी मुक्ति मिल जाती है। शनि दोषों से हर कोई भयभीत रहता है। सावन माह में कुछ उपाय करने से सभी दुखों का अंत हो जाता है और भगवान शंकर की कृपा प्राप्त होती है। उपाय इस प्रकार हैं—

शिवलिंग पर जल अर्पित करें
शिवलिंग पर जल अर्पित करें। शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। शिवलिंग पर जल अर्पित करने से शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करें
शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करने से भी भोले शंकर प्रसन्न होते हैं। हिंदू धर्म में गंगा जल को पवित्र माना जाता है। भगवान शंकर का गंगा जल से जरूर अभिषेक करें।

शिवलिंग पर दूध अर्पित करें
शिवलिंग पर दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं। शिवलिंग पर दूध अर्पित करने के बाद शिवलिंग का जल या गंगा जल से अभिषेक जरूर करें।

लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें
लिंगाष्टकम स्तोत्र
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥1॥

देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥2॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥3॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥4॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥5॥

देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥6॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥7॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥8॥

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥