सऊदी अरब ने विदेशी कामगारों के लिए अनुबंध पाबंदियों में छूट देने के लिए अहम फैसला लिया है। इसके तहत, कामगारों को सऊदी में रहते हुए अपनी नौकरी बदलने की आजादी होगी। इसकी घोषणा सऊदी अरब के मानव संसाधन मंत्रालय ने की है। सऊदी का यह फैसला अगले साल मार्च से लागू हो जाएगा।

सऊदी के मानव संसाधन मंत्रालय के उपमंत्री अब्दुल्लाह बिन नासीर ने बुधवार को पत्रकारों से कहा कि अब विदेशी कामगार बिना नियोक्ता की अनुमति के सऊदी अरब छोड़कर जा सकते हैं। नियोक्ता मतलब है कि जो उनका मालिक है या जहां नौकरी करते हैं। नासीर ने कहा कि सऊदी ने यह फैसला श्रम बाजार को आकर्षक बनाने के लिए किया है ताकि विदेशी श्रमिकों को लुभाया जा सके।
मानव संसाधन मंत्रालय ने कहा कि अब विदेशी कामगार अपनी नौकरी बदल सकते हैं। अपने हिसाब से सऊदी आ जा सकते हैं। नियोक्ता किसी का वीजा नहीं रख सकता है। सऊदी अरब में इसे कफाला सिस्टम कहा जाता है जिसके तहत नियोक्ताओं को यह अधिकार मिला हुआ था कि वो विदेशी कामगारों को नौकरी नहीं बदलने देंगे और देश छोड़कर जाना भी उनकी मर्जी पर निर्भर होता था। कफाला सिस्टम में इस सुधार का फायदा एक करोड़ों विदेशी कामगारों को मिलेगा जो सऊदी अरब की कुल आबादी के एक तिहाई हैं।

कतर 2022 में फीफा विश्व कप की मेजबानी करने वाला है। इसे देखते हुए कतर ने भी श्रम कानूनों को उदार बनाया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सऊदी के हालिया सुधार से विदेशी कामगारों को फायदा मिलेगा लेकिन इसे पूरी तरह से खत्म करने की जरूरत है।

ह्यूमन राइट्स वॉच की रिसर्चर रोथना बेगम ने अल-जजीरा से कहा है कि प्रवासी कामगारों के अब भी यह अनिवार्य है कि कोई नियोक्ता उन्हें सऊदी आने के लिए स्पॉन्सर बने तभी वो आ पाएंगे। ऐसे में उन कामगारों पर अब भी नियंत्रण नौकरी देने वालों के पास ही रहेगा।

सऊदी के कफाला सिस्टम के तहत, प्रवासी कामगारों के पास कोई अधिकार नहीं होता है कि अपने नियोक्ता के शोषण से बच सकें क्योंकि देश छोड़ने और नौकरी बदलने तक का अधिकार नहीं होता है। ऐसे में विदेशी कामगारों के साथ मनमानी होती है। उनसे ज्यादा घंटों तक काम कराया जाता है। एंप्लायर सैलरी देने में आनाकानी करते हैं।

कफाला में सुधरा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 का हिस्सा है। सलमान चाहते हैं कि सऊदी अरब विदेशी निवेशकों के लिए अहम ठिकाना बने और निजी सेक्टर विस्तार हो। साथ ही सऊदी की अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता को कम किया जाए।