कांग्रेस पार्टी में मुश्किलों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। लोकसभा चुनाव मेें हार के बाद से ही पार्टी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। पहले राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया तो वहीं अब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि अमेठी के रहने वाले संजय सिंह असम से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। संजय सिंह ने अपने इस्तीफे लिए पार्टी में संवादहीनता को कारण बताया है।



अतीत में जी रही है कांग्रेस
संजय सिंह ने इस्तीफा देने का बाद कहा कि 'कांग्रेस अभी भी अतीत में है, और उसे भविष्य के बारे में कुछ नहीं पता। आज देश पीएम मोदी के साथ है। अगर देश पीएम मोदी के साथ है तो मैं भी पीएम के साथ हूं। मैं बीजेपी में शामिल हो रहा हूं। मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है।' वहीं उन्होंने सफाई देते हुए ये भी कहा कि गांधी परिवार से जो रिश्ते हैं उसमें कहीं कोई गड़बड़ नहीं है। देश की जनता बीजेपी को स्वीकार कर चुकी है। प्रधानमंत्री सबको साथ लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं इसलिए हम भी उनके साथ हैं।'


पत्नी अमिता सिहं ने भी दिया इस्तीफा
दूसरी ओर उनकी पत्नी अमिता सिंह ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के जवाब में उन्होंने कहा कि 'हम लोग राजनीति कर रहे हैं। दोनों की सोच, दृष्टिकोण एक हैं। मैंने इसलिए नहीं छोड़ा कि वह मेरे पति हैं बल्कि हमारे विचार एक-दूसरे से मिलते हैं। यह कोई एक दिन की सोच नहीं है, यह कोई नाराजगी का फैसला नहीं है, हम नेशन बिल्डिंग के लिए अगर आगे आए हैं तो हमें नहीं लगता कि कांग्रेस में ऐसा मौका हमे मिलेगा। मुझे ऐसा लगता है कि सिर्फ मोदी जी के नेतृत्व में ऐसा मौका मिलेगा। यह एक सोचा समझा समय का निर्णय है।'

अमेठी से रखते हैं ताल्लुक
25 सितंबर 1951 को जन्में अमेठी राजघराने के वारिस संजय सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से ही की। जाहिर है कि यह वह दौर था जब कांग्रेस की हनक देश और और प्रदेश दोनों ही जगह की सियासत में थी। 1980 के लोकसभा चुनाव में डॉ. सिंह ने संजय गांधी का समर्थन किया। वह खुद भी 1980 से 1989 तक कांग्रेस के टिकट पर विधायक रहे।


संभाले कई मंत्रालय

इस दौरान प्रदेश सरकार में उन्होंने कई मंत्रालय देखे। वन, पशुपालन और डेयरी, खेल युवा कल्याण के अलावा परिवहन विभाग इनमें शामिल हैं। कांग्रेस ने 1990 में उन्हें राज्यसभा भेजा। 1990 से 1991 में केंद्र सरकार में संचार मंत्री रहे।



1998 में थामा बीजेपी का हाथ
1998 में वह बीजेपी के टिकट पर अमेठी से चुनाव लड़े और जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1999 में सोनिया के खिलाफ अमेठी से ही जब वह दोबारा चुनाव में उतरे तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा। सोनिया गांधी से चुनाव हारने के कुछ साल बाद वह दोबारा कांग्रेस में आ गए। अब एक बार फिर कांग्रेस की स्थिति यह है कि मौजूदा समय में प्रदेश से केवल एक ही सांसद जीत सका।