रूस और यूक्रेन के बीच महायुद्ध अब लगभग शुरू हो चुका है जिसके भयंकर परिणाम सामने आएंगे। इसी के चलते रूस के महाशक्तिशाली राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के 2 अलगाववादी क्षेत्रों दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दे दी है। इसके बाद से ही यूक्रेन-रूस तनाव अधिक गहरा गया है। रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने डेढ़ लाख से अधिक सैनिकों को तैनात कर रखा है। इसके तहत अब रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है।

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हालांकि, रूस का कहना है कि हमले की उसकी कोई योजना नहीं है और उसकी सेनाएं यूक्रेन की सीमा पर देश को नेटो से प्रसार से बचाने के लिए खड़ी हैं। इस बीच पुतिन की घोषणा ने अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को भड़का दिया है। अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों की भी घोषणा की है।


लेकिल अब ये बहस भी छिड़ गई है रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में दुनिया का कौनसा देश किस इनमें से किसके साथ है। वहीं, भारत किसका समर्थन करेगा इस पर भी अमेरिका और रूस दोनों की निगाहें टिकी हुई है। भारत ने अभी तक इस मसले पर निष्पक्ष रूख अपनाया हैं

अमेरिका-
अमेरिका शुरू से ही यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना के जमावड़े का विरोध करता आया है। वो हमेशा से चेतावनी देता आया है कि रूसी सेनाएं कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकती हैं। रूसी राष्ट्रपति द्वारा यूक्रेन के दो अलगाववादी क्षेत्रों को स्वतंत्र क्षेत्र की मान्यता दिए जाने को लेकर अमेरिका ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं।

ब्रिटेन-
ब्रिटेन ने रूस पर प्रतिबंध और कड़े किए हैं। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि ये बेहद खतरनाक संकेत है और रूस के कदम से यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन होगा। ब्रिटेन ने रूस के 6 बैंकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। रूस के तीन बड़े अरबपतियों की ब्रिटेन स्थित संपत्ति को भी फ्रिज कर दिया गया है और ब्रिटेन में उनके प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

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यूरोपियन यूनियन-
यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने यूक्रेन के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा था कि यूक्रेन के खिलाफ खतरा पूरे यूरोप के लिए खतरा है। ईयू ने रूसी बैंकों और ईयू के वित्तीय बाजारों तक रूस की पहुंच पर प्रतिबंध लगा दिया हैहैं इसके साथ ही ईयू उन रूसी सांसदों को निशाना बनाने की भी तैयारी कर रहा है जो यूक्रेन पर रूस के पक्ष पर सहमत हैं। ईयू रूस को वैश्विक बैंकिंग सिस्टम से भी काट सकता है।

चीन-
हाल के दिनों में रूस और चीन के बीच की नजदीकी बढ़ी है और अमेरिका के साथ चीन के रिश्ते खराब स्थिति में पहुंच चुके हैं। कुछ समय पहले चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रूस की सुरक्षा चिंताओं को जायज बताते हुए कहा था कि इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इसका समाधान होना चाहिए।

फ्रांस-

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने राष्ट्र के नाम एक संबोधन में यूक्रेन के दो क्षेत्रों को स्वतंत्र प्रदेश की मान्यता दी थी। फ्रांस ने पुतिन के संबोधन को 'पागलपन' करार दिया है। फ्रांस ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति ने फांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से जो वादा किया था, उसे तोड़ दिया और अब फ्रांस रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंध लगाएगा।

जर्मनी-
जर्मनी ने रूस की नॉर्ड स्ट्रीम 2 गैस पाइपलाइन को बंद कर दिया है। रूस इस परियोजना के जरिए जर्मनी को गैस पहुंचाने वाला था। जर्मनी ने कहा है कि रूस के हालिया कदम को लेकर ये फैसला किया गया है। जर्मनी शुरू से ही यूक्रेन के पक्ष में खड़ा रहा है।

बेलारूस-
बेलारूस रूस का बेहद करीबी सहयोगी रहा है। ऐसे वक्त में जब रूस-यूक्रेन का तनाव चरम पर है और कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है, बेलारूस रूस के साथ मिलकर मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहा है।

इटली-
इटली का इस मुद्दे पर कहना है कि वो समस्या का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है। साथ ही इटली ने कहा है कि वो नेटो को लेकर अपनी प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखेगा।

जापान-
जापान ने कहा है कि अगर रूस यूक्रेन पर हमला करता है तो वो अमेरिका का साथ देगा। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने रूस के हालिया कदम की निंदा करते हुए कहा है कि ये अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और यूक्रेन की संप्रभुता का उल्लंघन है।

सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात आदि देशों की नजदीकी अमेरिका से बढ़ी है लेकिन रूस के साथ भी इनके संबंध अच्छे हैं। इसलिए इन देशों को किसी एक का पक्ष लेने में मुश्किल होगी।