यूक्रेन पर रूस के हमले की वजह से पैदा हुए संकट के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  से बात की है। इस दौरान उन्होंने तत्काल हिंसा रोकने की अपील करते हुए सभी पक्षों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की सलाह दी है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से ज्यादा भारत के रुख की चर्चा हो रही है। जो बाइडेन ने भी कहा है कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर भारत से विचार-विमर्श करेंगे।

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के दो इलाकों दोनेत्स्क और लुहांस्क को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दे दी थी। इस पर भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपना पक्ष रखा थाअ इन दोनों इलाकों को रूस समर्थित विद्रोहियों ने पीपल्स रिपब्लिक ऑफ दोनेत्स्क और लुहांस्क घोषित किया था और 2014 से ही ये यूक्रेन से लड़ रहे हैं। इसके साथ ही पुतिन ने रूसी सैनिकों को भी इन इलाकों में जाने का आदेश दिया थाअ

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पुतिन के इसी फैसले को लेकर मंगलवार को यूएन सुरक्षा परिषद की बैठक हुई थी, जहां भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने भारत का पक्ष रखते हुए सभी से संयम बरतने की अपील की थी। एक तरफ पश्चिमी देशों ने व्लादिमीर पुतिन को आड़े हाथों लिया तो दूसरी तरफ भारत ने न रूस की निंदा की और न ही यूक्रेन की संप्रभुता की बात की। भारत के इस रुख पर कई लोगों ने सवाल उठाए तो कई लोगों ने बिल्कुल सही ठहराया।

अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्लादिमीर पुतिन से बात की है और इस दौरान उन्होंने 'अपने दीर्घकालिक दृढ़ विश्वास' को दोहराया कि रूस और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) समूह के बीच मतभेदों को सिर्फ 'ईमानदार और गंभीर वार्ता' से ही सुलझाया जा सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, बातचीत के दौरान पुतिन ने पीएम मोदी को यूक्रेन से संबंधित हालिया घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद पीएम मोदी ने तत्काल हिंसा रोकने की अपील की और सभी पक्षों से कूटनीतिक बातचीत और संवाद की राह पर लौटने के ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।