यूक्रेन के प्रमुख पूर्वी शहर लुहान्स्क पर रूसियों का कब्जा हो जाने के बाद यूक्रेन की सेना लिसिचांस्क में अपने ठिकानों से हट गई। कीव में सेना ने इसकी पुष्टि की है। सोशल मीडिया पोस्ट में जनरल स्टाफ ने कहा, लिसीचांस्क पर कब्जे के लिए भारी लड़ाई के बाद यूक्रेन के सशस्त्र बलों को अपने कब्जे वाले ठिकानों और लाइनों से हटने के लिए मजबूर किया गया।

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रूसी बलों को तोपखाने, विमान, कई रॉकेट लांचर और भारी मात्रा में गोला-बारूद मिल गए हैं। इसके घातक परिणाम होंगे। 25 जून को रूसी सेना द्वारा अपने जुड़वां शहर सेवेरोडोनेत्स्क पर कब्जा करने के एक हफ्ते बाद लिसीचांस्क का पतन हुआ। दो शहरों पर कब्जा करने का मतलब है कि रूस ने अब लगभग पूरे लुहान्स्क क्षेत्र और पड़ोसी डोनेट्स्क के अधिकांश हिस्सों को कब्जे में ले लिया है। उक्रेइंस्का प्रावदा के मुताबिक, राष्ट्र के नाम अपने वीडियो संबोधन में राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने जोर देकर कहा कि यूक्रेनी सेना लिसीचांस्क में वापस आ जाएगी, हमारी रणनीति के लिए धन्यवाद, आधुनिक हथियारों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए धन्यवाद।

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उन्होंने कहा, यूक्रेन कुछ भी आत्मसमर्पण नहीं कर रहा है। रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने बयान दिया कि उनकी सेना ने पहले दिन में लिसिचन्स्क पर कब्जा कर लिया और लुहान्स्क क्षेत्र को पूरे नियंत्रण में ले लिया है। उधर, जेलेंस्की ने कहा, जब मास्को के अधिकारी लुहान्स्क ओब्लास्ट के हालात पर रिपोर्ट करते हैं, तो उन्हें उन वादों को याद रखना चाहिए जो उन्होंने 24 फरवरी को पहले हमले के बाद किए थे। उन्हें इस समय तक क्या हासिल हुआ है और इसके लिए उन्होंने जो कीमत चुकाई है, उसका वास्तविक मूल्यांकन करें, क्योंकि उनकी हालिया रिपोर्ट पहले की तरह धूल में मिल जाएगी। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि यूक्रेनी सेना खार्किव, खेरसॉन और काला सागर में धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।