एक महीने से रूस के साथ युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सैनिकों ने रूस की सेना से कहा है कि बेहतर होगा कि वे जीवित अपने घर लौट जायें और यहां बेकसूर नागरिकों की हत्या न करें। एक रिपोर्ट में यूक्रेनी सैनिक के हवाले से कहा कि रूसी सैनिकों दौड़ो, भाग जाओ , बच्चों की जान नहीं लो और घर- परिवारों को बरबाद मत करो, अभी भी जीवित हो घर लौटो। 

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रिपोर्ट के मुताबिक रूस के सैनिक यूक्रेन में लड़ाई में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार  इस युद्ध में जहां रूस लड़खड़ा रहा है, वहीं यूक्रेन डटा हुआ है। माना जा रहा था कि काफी कम समय में यूक्रेन हार जाएगा। रूसी सेना खारकीव की चारों ओर यूक्रेन की सैन्य सीमा को भेद नहीं पाई और शहर की घेराबंदी करने में नाकाम रही। रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण किया था। एक महीने से रूसी मिसाइल खारकीव के सिटी सेंटर को निशाना बना रही है और करीब 14 लाख लोग देश छोड़ चुके हैं। कम से कम 190,000 रूसी सेना को यूक्रेन में तैनात किया गया है। यूक्रेन की सेना की संख्या 100,000 है लेकिन कीव का दावा है कि और सैनिकों को संख्या तेजी से बढ़ायेगा।

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वहीं दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को यहां अपने चीनी समकक्ष वांग यी से मुलाकात की और रूस-यूक्रेन युद्ध पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने संकट के समाधान के लिए कूटनीति और बातचीत पर सहमति जताई है। जयशंकर ने बैठक के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, यूक्रेन पर, हमने अपने-अपने ²ष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य पर चर्चा की, लेकिन सहमति व्यक्त की है कि कूटनीति और बातचीत प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे पहले भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन में मानवीय संकट पर रूस द्वारा लाए गए प्रस्ताव से दूर रहकर रूस-यूक्रेन की स्थिति पर अपना तटस्थ रुख बनाए रखा था। चीन के विदेश मंत्री वांग यी दो दिनों के लिए दिल्ली में हैं। वह गुरुवार शाम दिल्ली पहुंचे थे। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुए एक महीना हो गया है और रूस यूक्रेन के एक के बाद एक शहरों पर कब्जा करने के प्रयास कर रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्डिमिर जेलेंस्की ने रूस द्वारा अपने देश पर आक्रमण के खिलाफ दुनिया भर का समर्थन मांगा है, जिसे गुरुवार को पूरा एक महीना हो गया है। युद्ध 24 फरवरी को शुरू हुआ था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, जो आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं, ने बार-बार इसे पूर्वी यूरोपीय राष्ट्र को ‘डी-नाजिफाई’ करने के लिए शुरू किया गया एक ‘विशेष सैन्य अभियान’ कहा है। प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, यह विश्वास करना मूर्खता है कि रूसी व्यवसायों के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों का रूसी सरकार पर कोई प्रभाव पड़ सकता है। ये केवल रूसी समाज को मजबूत करेंगे।