रूस ने आज कहा कि वह पूर्वी यूक्रेन के खारकीव एवं सूमी में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने के लिए मानवीय कॉरीडोर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। भारत में रूस के नये राजदूत डेनिस अलीपोव ने आज यहां एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में खारकीव में भारतीय छात्र नवीन ज्ञानगोदर की मृत्यु पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की और कहा कि रूस इस घटना की जांच कराएगा कि आखिर किन परिस्थितियों में नवीन की जान गयी है। 

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उन्होंने कहा कि यूक्रेन में रूसी फौज नागरिकों एवं नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बना रहीं हैं। उन्होंने कहा कि रूस भारतीयों की सुरक्षा और उनकी निकासी को सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ करेगा। खारकीव एवं आसपास के इलाकों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा एवं उनको निकालने के लिए रूस भारत के संपर्क में है और इसके लिए एक मानवीय कॉरीडोर बनाने के लिए काम कर रहा है जिससे भारतीयों को सुरक्षित रूस की सीमा में निकाल लाया जाये। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह कॉरीडोर बहुत जल्द ही खुलेगा। अलीपोव ने अपने देश की ओर से भारत का इस बात के लिए आभार जताया कि उसनें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक संतुलित रुख अख्तियार किया और रूस सरकार के विरुद्ध प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया। उन्होंने कहा, हम भारत के रणनीतिक साझीदार हैं और भारत के एक संतुलित रूख के लिए बहुत आभारी हैं। भारत मामले की गहराई और कारणों को समझता है और पूरी स्थिति को उसकी जटिलताओं के साथ देखता है और इसीलिए उसका रुख पूरी तरह से पक्षपात रहित है। हमें उम्मीद है कि भारत इस रुख पर कायम रहेगा। 

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उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रतिबंध भारत को एस 400 मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली की आपूर्ति को प्रभावित नहीं करेंगे। यह पूछे जाने पर क्या प्रतिबंधों के कारण रूस से सैन्य उपकरणों की आपूर्ति प्रभावित होगी, राजदूत ने कहा कि रूस हमेशा राख से उठ कर खड़ा हुआ है और फिर से खड़ा होगा। इसमें कोई शक नहीं है। हमने अपनी सुरक्षा के लिए यथासंभव कदम उठाए हैं। जहां तक रक्षा व्यापार का सवाल है, हमारे पास सहयोग और भुगतान की प्रणाली है जो पश्चिमी वित्तीय प्रणाली से स्वतंत्र है। हमारे पर कारोबार एवं सहयोग के लिए भी अलग से प्रणाली है और इसके लिए हम कतई ङ्क्षचतित नहीं हैं। केवल मौजूदा परिस्थिति में हमारे समायोजन का सवाल है।