ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की भारत यात्रा के तुरंत बाद यूरोप के लगभग 8 बड़े नेता और मंत्री अगले कुछ दिनों में भारत का दौरा करने आ रहे हैं। इन बड़े नेताओं में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन भी शामिल हैं।

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अब जल्द ही चांसलर एंजेला मर्केल के तहत जर्मनी की रक्षा मंत्री रहीं वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी, यहां रूस-यूक्रेन संघर्ष से उत्पन्न संकट पर चर्चा की उम्मीद है। पोलैंड, लिथुआनिया, स्लोवेनिया, पुर्तगाल, नीदरलैंड, नॉर्वे और लक्जमबर्ग के विदेश मंत्रियों के भी भारत में होने की उम्मीद है।

आपको बता दें कि ये सभी नेता रायसीना डायलॉग के लिए आ रहे हैं। गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा वैश्विक भू-राजनीतिक एवं भू-आर्थिक चुनौतियों पर विचारों के आदान प्रदान के प्रमुख प्लेटफॉर्म रायसीना डायलॉग का सातवां संस्करण 25-27 अप्रैल तक नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है।

ये नेता भारतीय वार्ताकारों के साथ यूक्रेन में युद्ध पर चर्चा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जॉनसन ने भी भारतीय नेतृत्व के साथ युद्ध पर चर्चा की थी। अर्जेंटीना, आर्मेनिया, गुयाना, नाइजीरिया, मेडागास्कर और फिलीपींस के विदेश मंत्रियों के भी सम्मेलन में भाग लेने की उम्मीद है। 

इनके अलावा स्वीडन के पूर्व पीएम कार्ल बिल्ड्ट, कनाडा के पूर्व पीएम स्टीफन हार्पर, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी एबॉट के भी मौजूद रहने की संभावना है। आज से शुरू होने वाला यह सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस साल अपनी पहली विदेश यात्रा पर जर्मनी और डेनमार्क के रवाना होने से एक सप्ताह पहले होगा। वह रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे के आधार पर फ्रांस भी जा सकते हैं।

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उधर, बर्लिन में प्रधानमंत्री कोपेनहेगन जाने से पहले 2 मई को चांसलर ओलाफ स्कोल्ज से मुलाकात करेंगे, जहां वह भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, स्वीडन और नॉर्वे के प्रधानमंत्रियों से मिलेंगे। वहां भी, यूक्रेन-रूस संकट एजेंडे में शीर्ष पर रहने की उम्मीद है।