पक्षियों के बाद अब इंसानों में बर्ड फ्लू फैल रहा है जिसके लक्षण सामने आ रहे हैं। रूस में एक शख्स में बर्ड फ्लू के वायरस की मौजूदगी मिली है जिसके बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। इसकी जानकारी रूस की तरफ से विस्व स्वास्थ्य संगठन को भी दे दी गई है।

रूस के स्वास्थ्य अधिकारी एना पोपोवा के हवाले से बताया है कि 2020 में यहां के दक्षिणी हिस्से में बर्ड फ्लू का ये कहर देखा गया है। वहां के पॉल्ट्री प्लांट के 7 कर्मचारी बर्ड फ्लू वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। हालांकि उनकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है लेकिन अभी भी उनमें हल्के लक्षण नजर आ रहे हैं।

मानवों में बर्ड फ्लू के अधिकांश संक्रमण के मामले संक्रमित जीवित या मृत पोल्ट्री उत्पादों के साथ सीधे संपर्क में आने से जुड़े हुए है। बर्ड फ्लू जंगली पक्षियों के पलायन से फैलते हैं, इसलिए पोल्ट्री उत्पादक देश के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वो अपने मुर्गी पालन घरों को इन वन्यजीवों के संपर्क से बचाए रखने के लिए सटीक और उच्च व्यवस्था करें।

रूस की स्वास्थ्य अधिकारी एना ने कहा कि 7 कर्मचारियों से दूसरे लोगों में वायरस फैलने का कोई संकेत नहीं मिला है। सभी संक्रमितों को आइसोलेशन में रखा गया है और इनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों को ट्रेस करने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि बर्ड फ्लू फैलाने के लिए कई वायरस जिम्मेदार होते हैं लेकिन इसमें H5N1 को खतरनाक माना जाता है क्योंकि यही वायरस इंसानों में बर्ड फ्लू के संवाहक के तौर पर काम करता है और उन्हें इसका शिकार बनाता है. मानवों में बर्ड फ्लू के संक्रमण का पहला मामला साल 1997 में आया था जब हॉन्ग-कान्ग में मुर्गियों से एक शख्स में यह वायरस फैला था।

2003 से बर्ड फ्लू का यह वायरस चीन, यूरोप, अफ्रीका समेत एशिया के कई देशों में फैलना शुरू हो गया। साल 2013 में चीन में एक इंसान बर्ड फ्लू से संक्रमित पाया गया था। हालांकि WHO का दावा है कि बर्ड फ्लू आमतौर पर इंसानों को संक्रमित या प्रभावित नहीं करता है।

हालांकि, अगर बर्ड फ्लू से संक्रमित पोल्ट्री उत्पादों को ठीक से नहीं पकाया जाए तो इसे खाने से इंसान भी इसके शिकार बन सकते हैं। आमतौर पर बर्ड फ्लू पानी में रहने वाले बत्तखों में सबसे ज्यादा पाया जाता है लेकिन मुर्गियों में यह बेहद तेजी से फैलता है।