असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास के एक बयान को लेकर विवाद हो गया है। दास ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमले के दौरान आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने राहुल गांधी को बकवास सांसद बताया। दास के इस बयान से कांग्रेस तिलमिला गई है। कांग्रेस ने इस बयान को लेकर शुक्रवार को राजीव भवन के समक्ष मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और दास के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कांग्रेस के 100 सदस्य जमा हुए।

उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर सोनोवाल और दास का पुतला फूंका। आपको बता दें कि बुधवार को प्रदर्शन के दौरान दास ने राहुल गांधी को नोन्सेन्स पार्लियामेंटेरियन करार दिया था। हालांकि दास इस दौरान एक गलती कर बैठे। उन्होंने नोन्सेन्स पार्लियामेंटेरियन की जगह नोन्सेन्स पार्लियामेंट शब्द प्रयोग किया था।


कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन में पार्टी के वरिष्ठ नेता रकिबुल हुसैन, एकॉन बोरा, रंजन बोरा और अब्दुल खालेक शामिल हुए। हुसैन ने कहा, भाजपा में सेंस की कमी है। पंचायत चुनाव में वे अच्छे परिणाम प्रदर्शित करने में विफल रहे। अब वे अपमानजनक टिप्पणियों के जरिए अपनी सरकार की परफोर्मेंस की डिबेट से ध्यान भटकाना चाहते हैं। लोगों ने भाजपा सरकार की प्रासंगिकता को समझना शुरू कर दिया है। वे बहुत दबाव में है क्योंकि उन्हें पता है कि वे आगामी चुनाव में हारने वाले हैं। राहुल गांधी पर हमले के पीछे मुख्य वजह यही है।


प्रदर्शन के बाद एआईसीसी के सचिव प्रद्युत बोरदोलोई ने कहा कि नई दिल्ली में गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान सोनोवाल ने कांग्रेस को बेईमान पार्टी करार दिया था। हम सोनोवाल के बयान की निंदा करते हैं। इस तरह के असंसदीय शब्द मुख्यमंत्री की जुबान से शोभा नहीं देते। कौन बेईमान है? शायद सोनोवाल आजादी के पहले और बाद में कांग्रेस के योगदान को भूल गए हैं। अगर सोनोवाल आंकड़ों का पुनरीक्षण करेंगे तो उन्हें पता चलेगा कि सरमा प्रत्यक्ष रूप  से शारदा और लुईस बर्जर घोटालों से जुड़े हैं।


मुख्यमंत्री ने अपना करियर छात्र संघ नेता के रूप में शुरू किया था, बाद में असम गण परिषद में शामिल हो गए। अपने राजनीतिक करियर को सशक्त करने के लिए वह भाजपा में चले गए। प्रिय मुख्यमंत्री बेईमान कहने से पहले आपको सोचना चाहिए। कांग्रेस ने जहां हमेशा देश के लोगों के लिए काम किया वहीं भाजपा का मुख्य एजेंडा देश के पूंजीपतियों की जेबें भरना है। हुसैन ने कहा, मोदी सरकार ने चुनाव से पहले कई वादे किए थे लेकिन वे उन्हें पूरा नहीं कर पाए। अब भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने किसानों का कर्ज माफ कर दिया लेकिन बिजली  के बिल बढ़ा दिए। उन्होंने रसोई गैस के दाम कम करने का वादा किया था लेकिन असल परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं आया है।