बिजली से चलने वाले वाहनों और बैटरी के निर्माण क्षेत्र के बाद अब सरकार ने देश में वाहनों के उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित कलपुर्जों तथा ड्रोन के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 26058 करोड़ रुपए की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। 

अनुमान है कि इससे 42500 करोड़ रुपए का निवेश होगा और तकरीबन 7.6 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। यह घोषणा विभिन्न क्षेत्रों के लिए घोषित की जा रही सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) की नयी कड़ी है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि ऑटो और ड्रोन उद्योग को अगले पांच साल में 26058 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह सहायता उत्पादन क्षमता के सृजन और निवेश से जुड़ी होगी। 

सरकार का अनुमान है कि इन प्रोत्साहनों से देश में 2.30 लाख करोड़ रूपये के अतिरिक्त उत्पादन की क्षमता जुड़ेगी और इससे भारतीय ऑटो और ड्रोन उद्योग विश्व आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकेगा। ठाकुर ने कहा कि ड्रोन उद्योग के लिए पीएलआई योजना से 5000 करोड रुपए का नया निवेश आएगा और उत्पादन क्षमता 1500 करोड़ रुपए बढ़ेगी। 

इसकी अनुमानित 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि ड्रोन और ड्रोन घटक उद्योग के लिए पीएलआई, तीन साल की अवधि में 5,000 करोड़ के निवेश को बढ़ोतरी करेगी और कारोबार में 1500 करोड़ की वृद्धि होगी तथा 10,000 अतिरिक्त रोजगार पैदा होंगे। सरकार की यह घोषणा पहले केमिस्ट्री बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए दी गई प्रोत्साहन राशि 28100 करोड़ रूपये के अतिरिक्त होगी। 

दोनों प्रोत्साहन राशि घोषणाओं से देश में पर्यावरण के अनुकूल वाहनों का निर्माण संभव होगा । अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वाहनों की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। यह योजना उच्च मूल्य के उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी वाहनों और उत्पादों को प्रोत्साहित करेगी। इससे उच्च प्रौद्योगिकी, अधिक कुशल और हरित ऑटोमोटिव निर्माण में एक नए युग की शुरुआत भी होगी। 

ऑटो उद्योग और ड्रोन उद्योग के लिए प्रोत्साहन योजना केंद्रीय बजट 2021-22 के दौरान 1.97 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पहले किए गए 13 क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन योजनाओं की समग्र घोषणा का हिस्सा है। इन 13 क्षेत्रों के लिए योजनाओं की घोषणा के साथ, देश में न्यूनतम अतिरिक्त उत्पादन पांच वर्षों में लगभग 37.5 लाख करोड़ रूपये होने की उम्मीद है और पांच वर्षों में कम से कम एक करोड़ लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। ऑटो क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन योजना मौजूदा ऑटो कंपनियों के साथ-साथ नए निवेशकों के लिए खुली है जो अभी ऑटोमोबाइल या ऑटो विनिर्माण व्यवसाय में नहीं हैं।