बिहार में रोहतास जिले की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार को एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या करने के मामले में दोषी को फांसी सजा सुनाई। रोहतास के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सात) सह प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट (पाक्सो) अधिनियम के विशेष न्यायाधीश नीरज बिहारी लाल की अदालत ने जिले के डालमियानगर थाना क्षेत्र में नौ माह पूर्व दस वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या से जुड़े मामले में नामजद बलिराम सिंह को फांसी की सजा सुनाई है।

अदालत ने मामले को रेयर आफ द रेयरेस्ट करार दिया है। साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। सजायाफ्ता अभियुक्त बलिराम सिंह डालमियानगर थाना क्षेत्र के गंगौली गांव का निवासी है। वहीं, आठ लाख रुपये पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति के रूप में देने के लिए सरकार को निर्देशित किया गया है। विशेष लोक अभियोजक हीरा प्रताप सिंह ने बताया कि 14 नवंबर 2020 को बच्ची खेल रही थी तभी बलिराम ने उसे भगवान का फोटो दिखाने का लालच देकर अपने घर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। 

पहचान उजागर होने की डर से तथा साक्ष्य मिटाने के लिए दोषी ने उसकी हत्या कर शव को अपने ही घर में रखे लकड़ी के बक्से में छिपा दिया। इसके बाद वह अपने घर से भाग कर गांव में ही दूसरी जगह छिप गया। घटना के एक घंटे बाद बच्ची के परिजनों द्वारा खोजबीन के दौरान बलिराम के साथ बच्ची को देखने की बात पता चली तो परिजनों एवं ग्रामीणों के सहयोग से दोषी को गांव से पकड़ लिया गया। कड़ी पूछताछ के बाद उसी की निशानदेही पर स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में उसके घर में स्थित लकड़ी के बक्से से बच्ची का शव बरामद किया गया था। 

मामले में विशेष लोक अभियोजक द्वारा न्यायालय में 11 गवाहों की गवाही कराई गई और इसे रेयर आफ द रेयरेस्ट घटना बताते हुए अभियुक्त को फांसी की सजा देने के की मांग अदालत से की गई थी। अदालत द्वारा भी इसे रेयर ऑफ द रेयरेस्ट घटना मानते हुए बलिराम को भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं में दोषी करार देने के बाद फांसी की सजा सुनाई गई। अदालत ने पीड़ित परिवार को कंपनसेशन स्कीम फॉर वीमेन विक्टिम्स सरवाईवर ऑफ सेक्सुअल असाल्ट क्राइम 2019 के तहत आठ लाख रुपए का क्षतिपूर्ति देने का आदेश भी सरकार को जारी किया है।