नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस पर जारी की गई रिपोर्ट नेचर लवर्स को खुश कर देगी। दरअसल रिपोर्ट राष्ट्रीय बाघ अनुमान 2018 के चौथे चक्र की है जो ये दर्शाती है कि भारत देश दुनिया में बाघों के लिए सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित आवासों में से एक है। ज्ञात हो कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय हर चार साल में बाघों का आकलन करता है और इस साल की गई गणना के अनुसार बाघों की आबादी 2014 में 1,400 से बढ़कर 2018 में 2,977 हो गई। भारत में हर चार साल पर एक बार अखिल भारतीय बाघ आकलन एक रिपोर्ट जारी करता है। इससे पहले वो इसकी तीन रिपोर्ट 2006, 2010 और 2014 में दे चुका है।


इन राज्यों में सबसे कम जनसंख्या
अगर बात करें पूर्वोत्तर के राज्यों की तो वहां बाघों की आबादी 2018 में बढ़कर लगभग 219 हो गई है। जहां एक तरफ असम में बाघों की आबादी 167 से बढ़कर 190 हो गई तो वहीं दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में यह एक से बढ़कर 28 से 29 हुई है। जबकि मिजोरम और नागालैंड में कोई बाघ नहीं देखे गए। आखिरी बार मिजोरम से 3 बाघों की खबर 2014 में सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार नामेरी (असम), पक्के (अरुणाचल) और डंपा (मिजोरम) में बाघों की जनसंख्या में गिरावट देखी गई हैं लेकिन इस आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।


परिमल शुक्लवैद्य ने जताई खुशी

असम के वन मंत्री परिमल शुक्लवैद्य ने इस रिपोर्ट पर खुशी व्यक्त करते हुए एक ट्वीट किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि 2010 में असम 143 बाघों का घर था, इसके बाद 2014 में यह आंकड़ा 167 हो गया, तो वहीं इस वर्ष बाघों की संख्या में अच्छी खासी वृद्धि हुई है। बाघों की नई जनगणना के आंकड़ों पर अगर नजर डाले तो भारत अब लगभग 3,000 बाघों का घर है। दिल्ली में मोदी ने अपने भाषण में बताया कि भारत बड़ी बिल्लियों के लिए दुनिया के सबसे सुरक्षित आवासों में से एक है।


नहीं लिए गए ठीक से नमूने

वहीं दूसरी तरफ एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार भारतीय वन्यजीव संस्थान के क़मर कुरैशी जिन्होंने इस रिपोर्ट को तैयार करने में मदद की है उन्होंने चौकाने वाली बात कही है। उनके अनुसार कुछ क्षेत्र अच्छा काम नहीं कर रहे हैं जबकि कुछ अन्य में नमूना ठीक से नहीं लिया गया है। अन्य राज्यों की बात करे तो मध्य प्रदेश में बाघों की संख्या सबसे ज्यादा 526 देखी गई है। इसके बाद कर्नाटक में 524, तो वहीं उत्तराखंड 442 बाघों के साथ तीसरे नंबर पर रहा। बात करें छत्तीसगढ़ और मिजोरम की तो वहां बाघों की संख्या में गिरावट देखी गई जबकि ओडिशा में बाघों की संख्या निरंतर बनी हुई है।