उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार और उसकी निगरानी में असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार किया जा रहा है और इस प्रक्रिया में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। ये बातें गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान कही।

कांग्रेस नेता के आरोपाें को बताया झूठा

उन्होंने यह भी कहा कि पहली बार एनआरसी के मसौदे का प्रकाशन उच्चतम न्यायालय की निगरानी में हुआ। इसके साथ ही रिजिजू ने कांग्रेस सदस्य संजय सिंह के इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया कि पूर्वोत्तर राज्य में गैर असमी लोगों के खिलाफ भेदभाव हो रहा है और लोगों को अवैध तरीके से हिरासत में लिया जा रहा है। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि सरकार उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन कर रही है।

कांग्रेस नेता का आरोप
इससे पहले कांग्रेस के संजय सिंह ने यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया था कि असम मेंं एनआरसी तैयार किया जा रहा है लेकिन इसकी जो प्रक्रिया है उसे देख कर संदेह होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि एनआरसी तैयार करते समय कई लोगों के नाम छोड़ दिए गए और करीब सवा लाख मतदाताओं को संदिग्ध ‘डी वोटर’ की श्रेणी में रखा गया है। इन लोगों को हिरासत में भी ले लिया जाता है।

एनआरसी लिस्ट में नाम होने पर कैंपों में नहीं भेजा जाएगा
रिजिजू के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी साफ कर चुके हैं कि

एनआरसी की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पारदर्शिता के साथ

पूरी की जा रही है और इसमें किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।

साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री ने यह पहले ही कह दिया है कि केवल एनआरसी में नाम नहीं आने से किसी को विदेशी मानकर कैंपों में नहीं भेजा जाएगा। उन्हें इसके खिलाफ अपील करने और अपनी नागरिकता साबित करने का पूरा अवसर दिया जाएगा। उनके अनुसार कानूनी प्रक्रिया को पूरा किए बिना किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


30 जुलाई को जारी किया जाएगा एनआरसी का अंतिम मसौदा
उल्लेखनीय है कि असम के कुल 3.29 करोड़ नागरिकों में से 1.9 करोड़ का नाम पहली जनवरी को जारी एनआरसी के पहले ड्राफ्ट में प्रकाशित हो चुका है। बाकी 1.39 करोड़ लोगों का नाम 30 जुलाई को जारी किया जाना है।