मेघालय में टिकटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। चोकपोट सीट से लजारस संगमा को टिकट देने से नाराज चोकपोट निर्वाचन क्षेत्र की ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने रविवार को दक्षिण गारो हिल्स की जिला कांग्रेस कमेटी को सामूहिक रूप से अपने इस्तीफे सौंप दिए। चोकपोट में पार्टी कार्यकर्ताओं की मीटिंग के बाद सामूहिक इस्तीफे का फैसला लिया गया। बाघमारा की ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सदस्यों ने उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही इस्तीफे दे दिए थे। 

आपको बता दें कि मेघालय में अगले माह फरवरी में विधानसभा चुनाव है। राज्य की 60 विधानसभा सीटों के लिए 27 फरवरी को मतदान होगा। 3 मार्च को नतीजे घोषित होंगे। जिन सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफे दिए हैं, उनका कहना है कि वे जमीनी स्तर के कार्यकर्ता हैं। उन्हें जमीनी हालात के बारे में उन सभी लोगों से ज्यादा पता है। टिकट लिजारस की बजाय डब्ल्यू.डी.शिरा को देना चाहिए था। आपको बता दें कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने ही टिकट वितरण पर अंतिम मुहर लगाई है। इस्तीफा देने वाले समूह ने पार्टी आलाकमान के 

फैसले को गलत करार दिया है। 

महिला, ब्लॉक व यूथ कांग्रेस के 100 से ज्यादा सदस्यों ने लजारस को चुनाव मैदान में उतारने के कांग्रेस के फैसले के खिलाफ सामूहिक रूप से इस्तीफे दे दिए। इनका कहना है कि लजारस चोकपोट के लिए बाहरी हैं। असंतुष्टों में बीसीसी चेयरमैन, वाइस प्रेसिडेंट, यूथ प्रेसिडेंट, महिला मोर्चा की वाइस प्रेसिडेंट शामिल है। इस्तीफा देने वाले एक सदस्य ने कहा, पिछले कुछ सालों से हम बीसीसी प्रेसिडेंट डब्ल्यू डी.शिरा के नेतृत्व में चोकपोट में कांग्रेस की ग्रोथ में मदद कर रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि एआईसीसी और मेघालय प्रदेश कांग्रेस कमेटी(एमपीसीसी) देखेगी कि क्या हासिल किया है। 

हालांकि उनका लजारस को टिकट देने का फैसला गलत है और चुनाव हमें सही साबित करेंगे। बीसीसी चीफ एडवाइजर एल.सीएच संगमा ने कहा, हम एआईसीसी व एमपीसीसी के फैसले से नाखुश हैं। हमने स्थानीय उम्मीदवार मांगा था जो यहां की स्थानीय समस्याओं को अच्छे तरीके से समझता तो लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। इसलिए हमने पार्टी छोडऩे का फैसला किया है। हम अपने उम्मीदवार का समर्थन करेगे, जिसके आगामी चुनाव में जीतने का बेहतर चांस है। जिन लोगों ने सामूहिक रूप से कांग्रेस से इस्तीफे दिए हैं उन सभी ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त की क्योंकि कांग्रेस पहले से ही संकटपूर्ण स्थिति में है।